
अमेरिका ईरान युद्ध में फंसा है, लेकिन क्या अंदर से इस जंग को लेकर बंटा हुआ है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं, “मुझे कोई चारा नहीं था.” लेकिन उनके ही उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस की राय कुछ अलग है, शुरू में इस युद्ध के खिलाफ उन्होंने बात भी रखी थी. वहीं, अमेरिकी जनता भी बंटी हुई है, रिपब्लिकन सपोर्ट कर रहे हैं, तो डेमोक्रेट्स विरोध. क्या व्हाइट हाउस के अंदर ईरान जंग को लेकर दरार है या ये सिर्फ नजरिये का फर्क है? आइये समझते हैं पूरी सच्चाई.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस दोनों का एक लक्ष्य है. ईरान को परमाणु हथियार न बनने देना. लेकिन उनका रुख अलग-अलग है. ट्रंप इसे जरूरी फैसला मानते हैं, जबकि वेंस लंबे समय से विदेशी सैन्य हस्तक्षेप के खिलाफ रहे हैं. मार्च 2026 में ट्रंप ने खुद कहा, “मैं और जे.डी. वेंस दार्शनिक रूप से थोड़े अलग हैं. वो शुरू में शायद कम उत्साही थे, लेकिन बाद में काफी उत्साही हो गए.”
वेंस की चिंताएं: क्वागमायर और मिसाइल स्टॉक
जे.डी. वेंस इराक युद्ध के अनुभवी सैनिक हैं और फॉरएवर वॉर्स के कड़े विरोधी हैं. उन्होंने युद्ध शुरू होने से पहले चेतावनी दी थी कि ये संसाधनों की भारी बर्बादी और बहुत महंगा साबित हो सकता है. The Atlantic की हालिया रिपोर्ट (अप्रैल 2026) के मुताबिक वेंस ने बंद कमरों में पेंटागन के युद्ध चित्रण पर सवाल उठाए हैं. वे चिंतित हैं कि अमेरिका के मिसाइल स्टॉक की कमी को कम करके बताया जा रहा है.
दोनों का एकजुट पब्लिक फ्रंट
फिर भी दोनों नेता सार्वजनिक रूप से एकजुट दिखते हैं. वेंस ने कहा, “ट्रंप हमें इराक या अफगानिस्तान जैसी अनंत जंग में नहीं फंसाएंगे. इसका स्पष्ट लक्ष्य है, ईरान को न्यूक्लियर बम न बनने देना.” ट्रंप ने वेंस को अप्रैल 2026 में इस्लामाबाद (पाकिस्तान) में उच्च-स्तरीय बातचीत का जिम्मा सौंपा, जो वेंस की कूटनीतिक छवि पर भरोसा दिखाता है.
अमेरिकी जनता का बंटा हुआ रुख
मार्च-अप्रैल 2026 के पोल्स के मुताबिक अमेरिका गहराई से बंटा हुआ है, रिपब्लिकन: 70-85 फीसद युद्ध का समर्थन कर रहे हैं. वहीं 88-90 फीसद डेमोक्रेट्स युद्ध का विरोध कर रहे हैं. वहीं 60 फीसद इंडिपेंडेंट्स युद्ध के विरोध में हैं.
Pew Research (मार्च 2026) के मुताबिक 61 फीसद अमेरिकी ट्रंप के युद्ध संचालन से नाखुश हैं. Ipsos और YouGov पोल्स में ज्यादातर लोग चाहते हैं कि युद्ध जल्द खत्म हो, क्योंकि इसे राष्ट्रीय हित के खिलाफ मान रहे हैं.
विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स की राय
The New York Times की रिपोर्ट में कहा गया है कि वेंस युद्ध शुरू होने के खिलाफ थे क्योंकि उन्हें क्षेत्रीय अस्थिरता और भारी नुकसान का डर थाय फॉर्च्यून और AP News में ट्रंप के बयान का हवाला है कि दोनों बहुत अच्छे से साथ हैं, लेकिन दार्शनिक अंतर है. आने वाली किताब Regime Change में भी वेंस की शुरुआती विरोध की चर्चा है.
अमेरिकी राजनीति में ट्रंप-वेंस का मतभेद नया नहीं
ट्रंप और वेंस के बीच यह दार्शनिक मतभेद अमेरिकी राजनीति में नया नहीं है. ट्रंप हमेशा से अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत सैन्य हस्तक्षेप को सीमित रखना चाहते थे, लेकिन ईरान के परमाणु खतरे को उन्होंने अस्वीकार्य माना. वहीं जे.डी. वेंस 2016 में ट्रंप के समर्थक बने थे, लेकिन उन्होंने अपनी किताब Hillbilly Elegy और कई साक्षात्कारों में स्पष्ट कहा था कि अमेरिका को मध्य पूर्व की अनंत जंगों से दूर रहना चाहिए. वेंस का मानना है कि ऐसे युद्ध अमेरिकी मध्यम वर्ग के टैक्स पैसे की बर्बादी हैं.
क्या व्हाइट हाउस में दरार बढ़ सकती है?
हालांकि दोनों नेता सार्वजनिक रूप से एकजुट दिख रहे हैं, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक वेंस लगातार युद्ध की लंबाई और लागत पर सवाल उठा रहे हैं. अगर युद्ध 3-4 महीने से ज्यादा चला तो यह मतभेद और गहरा सकता है. कई रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिसाइल स्टॉक की कमी साबित हुई तो वेंस ट्रंप पर दबाव बना सकते हैं कि जल्द से जल्द कूटनीतिक समाधान निकाला जाए.
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और सहयोगी देशों की नजर
यह आंतरिक मतभेद अमेरिका के सहयोगी देशों को भी चिंता में डाल रहा है. इजराइल और सऊदी अरब ट्रंप के हॉकीश रुख से खुश हैं, लेकिन यूरोपीय देश वेंस की संयम वाली सोच को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. ब्रिटेन और फ्रांस के राजनयिकों ने निजी बातचीत में कहा है कि अगर व्हाइट हाउस में स्पष्ट एकता नहीं दिखी तो ईरान और उसके समर्थक देश (रूस-चीन) इसका फायदा उठा सकते हैं.
2026 चुनाव और घरेलू राजनीति पर असर
2026 के मिडटर्म चुनावों को देखते हुए यह विभाजन रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है. अगर युद्ध लंबा खिंचा और अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़ी तो वेंस जैसे आइसोलेशनिस्ट नेता मजबूत हो सकते हैं. वहीं ट्रंप का आधार अभी भी युद्ध का समर्थन कर रहा है. Pew Research के मुताबिक अगर युद्ध में अमेरिकी हताहत बढ़े तो इंडिपेंडेंट वोटर और युवा मतदाता रिपब्लिकन से दूर हो सकते हैं.
वेंस की पुरानी सोच और ट्रंप की हॉकीश नीति
जे.डी. वेंस ने 2022 में अपनी किताब Hillbilly Elegy के बाद कई इंटरव्यू में साफ कहा था कि अमेरिका को मध्य पूर्व की जंगों में फिर से फंसना नहीं चाहिए, क्योंकि ये युद्ध हमारे अपने लोगों की कीमत पर लड़े जाते हैं. ट्रंप हालांकि हमेशा से मैक्सिमम प्रेशर के हामी रहे हैं. अप्रैल 2026 में दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, “मुझे ईरान पर हमला करना पड़ा, क्योंकि न्यूक्लियर ईरान अमेरिका के लिए अस्तित्व का खतरा था.” दोनों के बीच यही दार्शनिक फर्क आज भी दिख रहा है.
युद्ध की लागत और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर असर
पेंटागन के आंकड़ों के मुताबिक मार्च-अप्रैल 2026 तक ईरान युद्ध पर अमेरिका पहले ही 18 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुका है. वेंस बार-बार कह रहे हैं कि ये खर्च अमेरिकी टैक्सपेयर्स की जेब से हो रहा है और अगर युद्ध लंबा चला तो मिसाइलों और हथियारों का स्टॉक खत्म हो जाएगा. कई अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगर युद्ध जून तक चला तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर 0.8 प्रतिशत का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है.
कांग्रेस और विपक्ष की भूमिका
अमेरिकी कांग्रेस में भी विभाजन साफ दिख रहा है. रिपब्लिकन सीनेटर ज्यादातर ट्रंप का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन कुछ स्वतंत्र रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स वेंस की तरह सीमित हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं. अप्रैल 2026 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक प्रस्ताव आया था कि युद्ध की समीक्षा हो और कांग्रेस को ज्यादा जानकारी दी जाए. वेंस ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि ट्रंप ने इसे राजनीतिक खेल बताया.
आगे क्या? संभावित समाधान और चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वेंस की कूटनीतिक कोशिशें (जैसे इस्लामाबाद वार्ता) सफल हुईं तो युद्ध जल्द खत्म हो सकता है. लेकिन अगर ईरान ने जवाबी हमले तेज किए तो ट्रंप का हॉकीश रुख मजबूत हो जाएगा. Foreign Affairs पत्रिका की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट में लिखा गया है, “ट्रंप-वेंस का यह मतभेद अमेरिका को मजबूत नहीं, बल्कि कमजोर दिखा रहा है और ईरान इसका फायदा उठा सकता है.”
तो अमेरिका के अंदर ट्रंप-वेंस में दार्शनिक मतभेद है, जनता बंटी हुई है, लेकिन लक्ष्य एक है न्यूक्लियर ईरान को रोकना। क्या ये युद्ध जल्द खत्म होगा या लंबा खिंचेगा?