उज्जैन को मिला गौरव, आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. नारायण व्यास को पद्म श्री, परिवार में जश्न का माहौल

उज्जैन को मिला गौरव, आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. नारायण व्यास को पद्म श्री, परिवार में जश्न का माहौल

देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म श्री 2026 की घोषणा में उज्जैन के वरिष्ठ आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. नारायण व्यास का नाम शामिल किया गया है. डॉ. नारायण व्यास ने वर्षों तक पुरातत्व, इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है. उज्जैन सहित मालवा अंचल की प्राचीन विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है.

उनके शोध और कार्यों से कई ऐतिहासिक स्थलों की पहचान को नई दिशा मिली है, वहीं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है. पद्म श्री सम्मान की घोषणा के बाद उज्जैन में हर्ष का माहौल है. शहर के इतिहासकारों, बुद्धिजीवियों और नागरिकों ने डॉ. व्यास को बधाई देते हुए इसे उज्जैन के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है.

ASI में रहे सीनियर आर्कियोलॉजिस्ट

डॉ. नारायण व्यास ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) में सीनियर आर्कियोलॉजिस्ट के रूप में 2009 तक सेवा की और रॉक आर्ट, प्रागैतिहासिक साइट्स के अध्ययन में विशेषज्ञता हासिल की. यह उनके अनसंग योगदान को हीरो के रूप में उजागर करती है, जो भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में सफल रहे.

पूरे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण

मध्य प्रदेश के पुरातत्व क्षेत्र में ग्रैंड ओल्ड मैन कहे जाने वाले नारायण व्यास का यह सम्मान राज्य के लिए गौरव का क्षण है. डॉ. व्यास ने एएसआई में रहते हुए भीमबेटका की प्रागैतिहासिक रॉक पेंटिंग्स की खोज और संरक्षण में योगदान दिया, जो 2003 में यूनेस्को विश्व धरोहर बनी. वहीं रानी की वाव (2014 में यूनेस्को) के स्टेपवेल और सांची स्तूपों के बौद्ध स्थलों के अध्ययन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. रॉक आर्ट पर पोस्ट-डॉक्टरेट (D.Litt) करने वाले डॉ. व्यास ने स्पेन जैसे देशों में सहयोग किया.

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