उत्तर प्रदेश: गोसाईगंज के MLA अभय सिंह दोहरे हत्याकांड में बरी, 19 साल बाद आया फैसला

लखनऊ की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने आज (31 मार्च) 19 साल पुराने चर्चित दोहरे हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने गोसाईगंज विधायक अभय सिंह समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. कोर्ट ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को साबित न होने पर फैसला सुनाया. जिसके बाद सभी को बरी कर दिया गया.

इस मामले में अभय सिंह के अलावा रविंद्र उर्फ रज्जू, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही और फिरोज अहमद को भी बरी किया गया.कोर्ट ने इस मामले में पेश सबूतों और गवाहों को पर्याप्त नहीं मानते हुए यह फैसला सुनाया. जिसके बाद कोर्ट ने अभय सिंह और अन्य आरोपियों पर लगे सभी आरोपों से उन्हें मुक्त कर दिया. अभय सिंह की तरफ से कोर्ट में वकील सत्येंद्र सिंह ने पक्ष रखा. इस दौरान सिंह ने बताया कि 19 साल बाद इस मामले में कोर्ट ने अभय सिंह, रविंद्र सिंह, अजय प्रताप सिंह और फिरोज अहमद को दोष मुक्त किया है.

क्या थी घटना

दरअसल 31 मार्च 2007 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बाजारखाला इलाके में स्थित पूर्वांचल टेंट हाउस में दो युवकों की निर्मम हत्या कर दी गई थी. मृतक शत्रुघ्न सिंह उर्फ छोटू और उनके नौकर जितेंद्र त्रिपाठी थे. आरोप था कि अभय सिंह समेत चारों आरोपी टेंट हाउस में घुसकर दोनों को गोली मारकर मौत के घाट उतार गए थे. यह मामला उस समय पूरे पूर्वांचल में चर्चा का विषय बना था. 13 अगस्त 2008 को पुलिस ने फिरोज अहमद, अजय सिपाही, अभय प्रताप सिंह और रविंद्र के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. इस मामले में अभय सिंह को 120 बी का मुलजिम मनाया गया था, क्योंकि वह उस समय जेल में थे.

19 साल बाद कोर्ट का फैसला

लंबे मुकदमे के बाद आज एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को सभी धाराओं से बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका. कोर्ट ने विधायक अभय सिंह समेत सभी आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया.

सिंह के समर्थकों ने किया फैसले का स्वागत

कोर्ट के इस फैसले से विधायक अभय सिंह को बड़ी राहत मिली हैं. उनके समर्थकों ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सच की जीत हुई है. वहीं अभय सिंह ने भी इसे न्याय की जीत बताया. उनका कहना है कि वो निर्दोष थे. 19 साल बाद कोर्ट से उन्हें इंसाफ मिला है. इधर कोर्ट द्वारा आरोपियों को बरी करने पर पीड़ित पक्ष ने सवाल खड़े किए हैं. पीड़ित पक्ष के वकील का कहना है कि वो इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे.

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