
पश्चिम बंगाल के बारासात संसदीय क्षेत्र से सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को शिकायत पत्र देकर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को सदन से निष्कासित करने की मांग की है. काकोली घोष दस्तीदार का आरोप है कि कल्याण बनर्जी सदन की बैठकों और कार्यवाही के दौरान लगातार उनके तथा अन्य महिला सांसदों के खिलाफ आपत्तिजनक, अपमानजनक और महिला विरोधी टिप्पणियां कर रहे हैं.
10 जून को लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए इस पत्र में दस्तीदार ने कहा है कि यह व्यवहार किसी बहस के दौरान अचानक से हुई कोई एकलौती घटना नहीं है, बल्कि यह एक व्यवस्थित और दोहराया जाने वाला पैटर्न बन चुका है.
डराने-धमकाने का प्रयास और अभद्र टिप्पणियां
पत्र के मुताबिक, कल्याण बनर्जी द्वारा बार-बार किए जाने वाले व्यक्तिगत हमले, डराने-धमकाने का प्रयास और अभद्र टिप्पणियां राजनीतिक मतभेदों की सीमा को लांघकर सीधे तौर पर मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में आती हैं. इस आचरण ने न केवल उन्हें व्यक्तिगत पीड़ा पहुंचाई है, बल्कि संसद में महिला सदस्यों की स्वतंत्र और निडर भागीदारी को भी बाधित करने वाला माहौल पैदा किया है.
बोलने की स्वतंत्रता के विशेषाधिकार
काकोली घोष ने साफ किया कि यह आचरण लोकसभा के प्रक्रिया और कार्य-संचालन नियमों के नियम 349 और 352 के खिलाफ है, जो सदन की गरिमा बनाए रखने की बात करते हैं. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत मिलने वाले ‘बोलने की स्वतंत्रता के विशेषाधिकार’ का हवाला देते हुए कहा कि इसे किसी के उत्पीड़न या दुर्व्यवहार का लाइसेंस नहीं माना जा सकता.
कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अपील
उन्होंने अध्यक्ष से लोकसभा के नियम 314(1) के तहत मामले का तत्काल संज्ञान लेने और कल्याण बनर्जी को सदन से निष्कासित करने समेत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया है, ताकि संसद में एक सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित हो सके.