भारतीय एस्ट्रोनॉमर्स (Astronomers) यानी खगोलविदों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है. उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक दुर्लभ ‘ब्लू स्ट्रैगलर स्टार’ (BSS) को ढूंढ निकाला है. जो अभी बन रहा है. इससे तारों के निर्माण की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष प्रमाण मिला है. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि ये अनोखे तारे कैसे बनते हैं.
ब्लू स्ट्रैगलर स्टार’ ऐसे तारे होते हैं जो उसी क्लस्टर (तारों के समूह) के दूसरे तारों की तुलना में ज़्यादा गर्म, ज्यादा चमकदार और ज्यादा बड़े (द्रव्यमान में अधिक) दिखाई देते हैं. ‘ब्लू स्ट्रैगलर स्टार’ (BSS) खोज इन असामान्य तारों के निर्माण और विकास को समझने के लिए अब तक के सबसे मजबूत प्रमाणों में से एक है.
कैसे दोबारा पुनर्जीवित होते हैं तारे
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि एस्ट्रोनॉमर्स (Astronomers) लंबे समय से इनकी उत्पत्ति और विकास को समझने की कोशिश कर रहे हैं. मंत्रालय ने कहा कि ये तारे किसी साथी तारे से या तारकीय विलय के माध्यम से द्रव्यमान प्राप्त करते हैं, जिससे वो प्रभावी रूप से पुनर्जीवित हो जाते हैं. ऐसी निर्माण प्रक्रियाओं के प्रत्यक्ष अवलोकन संबंधी प्रमाण काफी दुर्लभ हैं.
Astronomers discover an actively forming luminous blue straggler star
✶Indian astronomers, with international collaborators, have discovered a Blue Straggler Star (BSS) in the process of forming, providing rare direct evidence of how these unusual stars are created
✶Blue pic.twitter.com/MpZKHsPFog
— PIB India (@PIB_India) July 27, 2026
वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन
इसकी जांच के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया. शोधकर्ताओं ने करीब 9,500 प्रकाश वर्ष दूर स्थित पुराने खुले तारा समूह कोलिंडर 261 में मौजूद द्विआधारी तारा प्रणाली TIC 327546480 का अध्ययन किया.
कैसे होते हैं ब्लू स्ट्रैगलर स्टार
ब्लू स्ट्रैगलर ऐसे तारे होते हैं जो अपने समूह के अन्य तारों की तुलना में अधिक गर्म, चमकीले और अधिक विशाल दिखाई देते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये तारे किसी साथी तारे से पदार्थ हासिल करने या तारकीय विलय के कारण दोबारा युवा जैसे दिखाई देने लगते हैं. इस नई खोज में वैज्ञानिकों ने पाया कि ब्लू स्ट्रैगलर अपने कम द्रव्यमान वाले साथी तारे से लगातार पदार्थ हासिल कर रहा है. इस प्रक्रिया के कारण तारे का द्रव्यमान बढ़ रहा है और उसका कायाकल्प जारी है.
तीव्र एक्स-रे उत्सर्जन का भी पता चला
शोधकर्ताओं ने NASA के TESS अंतरिक्ष मिशन से प्राप्त उच्च-सटीकता वाले प्रकाश वक्रों और चिली स्थित यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला (ESO) के Very Large Telescope से मिले रेडियल वेग के आंकड़ों का विश्लेषण किया. अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने इस प्रणाली से तीव्र एक्स-रे उत्सर्जन का भी पता लगाया. यह संकेत देता है कि साथी तारे से स्थानांतरित पदार्थ लगातार ब्लू स्ट्रैगलर द्वारा ग्रहण किया जा रहा है.
तारा समूह की अनुमानित उम्र
विश्लेषण के मुताबिक, ब्लू स्ट्रैगलर का द्रव्यमान सूर्य से लगभग 1.67 गुना है, जबकि उसका साथी तारा करीब 0.32 सौर द्रव्यमान का है. इस द्विआधारी प्रणाली का कक्षीय आवर्तकाल 2.11 दिन है. विकासवादी मॉडलिंग से पता चलता है कि दोनों तारों के बीच द्रव्यमान का स्थानांतरण करीब 5.46 अरब वर्ष पहले शुरू हुआ था और यह प्रक्रिया अब भी जारी है. इस तारा समूह की अनुमानित उम्र करीब 7 अरब साल है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह प्रणाली ब्लू स्ट्रैगलर तारों के निर्माण की प्रक्रिया को वास्तविक समय में समझने का दुर्लभ अवसर प्रदान करती है. इससे बाइनरी स्टार सिस्टम के विकास और तारों के कायाकल्प से जुड़े सिद्धांतों की जांच में मदद मिलेगी.
