कौन-सी तपस्या करें कि भगवान प्रकट हों? प्रेमानंद महाराज का जवाब हैरान कर देगा

Premanand Maharaj:भगवान से प्रार्थना केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि हृदय की सच्ची पुकार है. जब मनुष्य अपने अहंकार, भय और अपेक्षाओं से ऊपर उठकर ईश्वर के सामने नतमस्तक होता है, तभी प्रार्थना सच्ची होती है.
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