रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीय युवाओं के परिजनों का दर्द अब सड़कों पर छलक पड़ा है. हरियाणा के सोनू कुमार और अमन पुनिया जैसे युवक एजेंटों के झांसे में आकर गार्ड की नौकरी के नाम पर रूस भेजे गए, लेकिन मोर्चे पर लड़ने को मजबूर हुए. कई लापता हैं, कुछ की लाशें लौटीं. परिजन जंतर मंतर पर न्याय की गुहार लगा रहे हैं.