
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 6-7 मई 2026 तक सूरीनाम (Suriname) का आधिकारिक दौरा किया. इस दौरे में दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, कृषि, स्वास्थ्य, संस्कृति और बुनियादी ढांचे सहित कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है. यात्रा के दौरान भारत-सूरीनाम संयुक्त आयोग बैठक (JCM) का 9वां सत्र आयोजित हुआ, जिसकी सह-अध्यक्षता जयशंकर और सूरीनाम के विदेश मंत्री मेल्विन बौवा (Melvin W. J. Bouva) ने की. दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत और बहुआयामी बताते हुए वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया.
भारत की ओर से सूरीनाम के बुनियादी ढांचे और रणनीतिक क्षेत्रों के विकास के लिए रियायती ऋण (Lines of Credit) की पेशकश की गई. साथ ही अगली संयुक्त आयोग बैठक भारत में आयोजित करने पर सहमति बनी है. विदेश मंत्री ने सूरीनाम की राष्ट्रपति जेनिफर गीर्लिंग-सिमोंस से मुलाकात कर भारत सरकार और जनता की ओर से शुभकामनाएं दीं. साथ ही उपराष्ट्रपति अश्विन अधीन के साथ बैठक में दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच संसदीय आदान-प्रदान के महत्व को रेखांकित किया.
पैशन फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी को जयशंकर ने सूरीनाम को सौंपा
जयशंकर ने भारतीय अनुदान और तकनीकी सहायता से विकसित पैशन फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी (Passion Fruit Processing Facility at MCP Agro N.V.) परियोजना को सूरीनाम को सौंपा, जिससे कृषि आधारित उद्योगों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी. उन्होंने नए क्विक इंपैक्ट प्रोजेक्ट्स पर काम करने की भी बात कही. दौरे में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहलुओं पर भी विदेश मंत्री ने बात की. उन्होंने राजधानी पारामारिबो में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की.
बाबा एंड माई स्मारक पर जाकर सूरीनाम में भारतीय मूल के लोगों के पहले आगमन को याद किया और मैरीबर्ग के शहीद स्मारक पर भी सम्मान व्यक्त किया. उन्होंने लालरूख म्यूजियम का दौरा किया, जो हिंदुस्तानी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करता है.
भारत और सूरीनाम की रिश्ते लगातार हो रहे मजबूत- विदेश मंत्री
विदेश मंत्री ने भारतीय प्रवास के इतिहास पर आधारित एक हफ्ते की राष्ट्रीय अभिलेखागार प्रदर्शनी का उद्घाटन किया. अपने संबोधन में उन्होंने गिरमिटिया समुदाय के साहस और संघर्ष को याद करते हुए कहा कि भारत और सूरीनाम के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं. भारतीय समुदाय से बातचीत में जयशंकर ने भारत के विकास और परिवर्तन की चर्चा करते हुए कहा कि भारत सूरीनाम की प्रगति और समृद्धि का विश्वसनीय साझेदार बना रहेगा.