जयशंकर ने की कतर के PM और UAE के विदेश मंत्री से बात, पश्चिम एशिया पर चर्चा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से पश्चिम एशिया संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर को लेकर रविवार को चर्चा की. विदेश मंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर बातचीत की.

कतर के प्रधानमंत्री और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री से जयशंकर की फोन पर बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई हालिया चेतावनी के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है.

पश्चिम एशिया संघर्ष पर बातचीत

ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को नौवहन के लिए फिर से नहीं खोला गया तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट कर दिया जाएगा. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा कि कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री अल थानी के साथ जारी संघर्ष को लेकर टेलीफोन पर बातचीत हुई.

जयशंकर ने अल नाहयान से बातचीत के बाद अधिक जानकारी साझा किए बिना कहा कि उनसे पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अल नाहयान के साथ पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति पर चर्चा की.

भारत की ऊर्जा खरीद का प्रमुख स्रोत

फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को ईरान द्वारा अवरुद्ध किए जाने के बाद तेल और गैस की कीमतों में वैश्विक स्तर पर तेजी आई है. पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है.

ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर गंभीर असर

ईरान ने भारत समेत अपने मित्र देशों के जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी है. भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष जल्द से जल्द खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट से ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए पिछले कुछ हफ्तों में कूटनीतिक प्रयास किए हैं. भारत का मानना है कि यदि इस समुद्री मार्ग की नाकेबंदी जारी रहती है तो भारत समेत कई देशों की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है.

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