टाटा और एसपी ग्रुप में महा-डील की तैयारी! टाटा संस को लेकर इस फॉर्मूले पर हो रहा विचार

टाटा और एसपी ग्रुप में महा-डील की तैयारी! टाटा संस को लेकर इस फॉर्मूले पर हो रहा विचार

भारतीय कॉरपोरेट जगत के दो सबसे बड़े दिग्गजों-टाटा ग्रुप (Tata Group) और शापूरजी पालनजी ग्रुप (SP Group)—के बीच सालों पुराने हिस्सेदारी विवाद को सुलझाने के लिए एक नई और ऐतिहासिक हलचल शुरू हो गई है. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों समूह टाटा संस (Tata Sons) में एसपी ग्रुप की 18.4 फीसदी हिस्सेदारी के वैल्यूएशन (Valuation) को लेकर जारी बड़े मतभेद के बीच, वैल्यू अनलॉक करने के लिए ‘शेयर स्वैप’ (Share Swap – शेयरों की अदला-बदली) के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. यह कदम भारत के सबसे बड़े कॉरपोरेट विवादों में से एक के स्थायी समाधान की दिशा में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर किस तरह की खबर सामने आई है…

हिस्सेदारी को लेकर हुई चर्चा

बातचीत से जुड़े लोगों ने बताया कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, SP चेयरमैन शापूर मिस्त्री और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के बीच पहले बातचीत का एक दौर हुआ. इसमें टाटा ने एक ऐसे फ्रेमवर्क का समर्थन किया जिसके तहत टाटा संस डील के लिए कर्ज नहीं लेगा. बाद की बातचीत में टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के एग्जीक्यूटिव्स भी शामिल हुए. इनमें टाटा के करीबी और टाटा ट्रस्ट्स के कंसल्टेंट फारोख सुबेदार भी शामिल थे. जानकारी के अनुसार वैल्यूएशन (मूल्यांकन) एक बड़ी अड़चन उभरकर सामने आई. दोनों पक्ष अनलिस्टेड टाटा संस की हिस्सेदारी और लिस्टेड टाटा ग्रुप के शेयरों की वैल्यू को लेकर मतभेद दूर नहीं कर पाए, जो किसी भी स्वैप समझौते का हिस्सा बन सकते थे.

मॉनेटाइजेशन के तरीके पर मतभेद

गुरुवार को ग्रुप की 16 लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 25.28 लाख करोड़ रुपए था, जिसमें इन कंपनियों में टाटा संस की हिस्सेदारी की वैल्यू लगभग 11.9 लाख करोड़ रुपए थी. SP ग्रुप चलाने वाले मिस्त्री परिवार ने कर्ज न लेने की शर्त को कमर्शियल रूप से अव्यावहारिक माना. उन्होंने टाटा संस की लिस्टिंग को वैल्यू अनलॉक करने का सबसे बेहतर तरीका बताया, जिससे बिना किसी अतिरिक्त बोझ के वैल्यू मिल सके. माना जाता है कि नोएल टाटा, टाटा संस की लिस्टिंग के खिलाफ हैं.

क्या बदल रहा है टाटा का रुख?

इस बातचीत ने टाटा ट्रस्ट्स के कुछ हिस्सों में भी बहस छेड़ दी है. कुछ अधिकारियों ने निजी तौर पर कहा है कि टाटा ने लगभग एक साल पहले कहा था कि वह SP ग्रुप की शेयरहोल्डिंग से जुड़े मामलों में शामिल नहीं होंगे क्योंकि वह मिस्त्री परिवार से जुड़े हैं. टाटा की पत्नी आलू, शापूर मिस्त्री की बहन हैं. एग्जीक्यूटिव्स अब सवाल उठा रहे हैं कि क्या टाटा का इस मामले को लेकर रुख बदल रहा है? हालांकि, नोएल टाटा के करीबी एक अन्य एग्जीक्यूटिव ने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन के तौर पर वह निश्चित रूप से इस मामले में अपनी बात रख सकते हैं, क्योंकि ट्रस्ट के पास टाटा संस की 66 फीसदी हिस्सेदारी है.

एसपी ग्रुप को मिले 21500 करोड़

पिछले हफ्ते, मीडिया रिपोर्ट में सामने आया था कि SP ग्रुप को अपने रीफाइनेंसिंग प्लान की पहली किश्त के लिए लगभग 21,500 करोड़ रुपए की प्रतिबद्धता मिली है, और इस इश्यू को घरेलू और विदेशी निवेशकों ने पूरी तरह से सब्सक्राइब किया है. इस फंडरेजिंग में 15,200 करोड़ रुपए के तीन साल वाले रुपये बॉन्ड शामिल हैं, जिनकी यील्ड लगभग 18.95 फीसदी है, और लगभग 650 मिलियन डॉलर के डॉलर बॉन्ड हैं, जिनसे करीब 14.5 फीसदी यील्ड मिलने की उम्मीद है. इस डील के 20 जुलाई को पूरा होने की उम्मीद है.

18 महीनों में करानी होगी संस की लिस्टिंग

यह रीफाइनेंसिंग SP ग्रुप की कंपनी ‘इक्विजेन इन्वेस्टमेंट’ के जरिए की जा रही है और इसे टाटा संस में ग्रुप की 18.37 फीसदी हिस्सेदारी का सपोर्ट हासिल है. इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी के महंगे कर्ज के एक हिस्से को लंबे समय की फंडिंग से बदलने के लिए किया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि SP ग्रुप के कर्ज की रीफाइनेंसिंग को लेकर ज़्यादातर भरोसा टाटा संस के गिरवी रखे शेयरों के सपोर्ट की वजह से है. बॉन्ड जारी होने के 18 महीनों के अंदर, कंपनी को या तो टाटा संस के IPO की घोषणा करवानी होगी या फिर टाटा संस, SP ग्रुप और (अगर लागू हो तो) किसी तीसरे पक्ष के खरीदार के बीच हिस्सेदारी के निपटारे की शर्तों पर सहमति बनानी होगी.

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