
गुजरात के अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 के हादसे को एक साल हो गया है. फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स एसोसिएशन (FIPA) ने गुरुवार को विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की जांच पर सवाल उठाए. इसमें एफआईपीए ने आरोप लगाया कि पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव था. बता दें कि 12 जून 2025 को हुए हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी. इसमें 241 पैसेंजर और क्रू मेंबर मारे गए थे. क्रैश के बाद, DGCA और AAIB ने मामले की जांच शुरू की.
एफआईपी अध्यक्ष सीएस रंधावा ने कहा कि 11 जुलाई, 2025 को जारी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कुछ तकनीकी मुद्दों का जिक्र किया गया है, लेकिन उनमें से कई के जवाब अभी भी स्पष्ट नही हैं. उन्होंने दावा किया कि इंजन की खराबी के समय और रिपोर्ट में प्रस्तुत अन्य तकनीकी विवरणों के संबंध में विसंगतियां हैं.
शुरुआती रिपोर्ट में गलतियां
सीएस रंधावा ने कहा कि वेस्टर्न मीडिया ने रिपोर्ट छापी थी कि फ्यूल स्विच बंद था. AAIB और मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन की शुरुआती रिपोर्ट में गलतियां सामने आईं. उन्होंने कहा कि प्लेन में एक गंभीर इलेक्ट्रिकल फॉल्ट था. इस सच्चाई को सामने लाने के लिए AAIB, मिनिस्ट्री और सभी डिपार्टमेंट को करीब 20 लेटर लिखे जा चुके हैं. हम आज भी इस हादसे को भूल नहीं सकते.
फ्यूल स्विच बंद होने से हादसा
एफआईपी अध्यक्ष ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट में यह सुझाव देने का प्रयास किया गया था कि हादसा फ्यूल स्विच बंद होने के कारण हुआ था. इस तरह से पेश की गई जानकारी ने जनता में यह धारणा पैदा कर दी कि पायलटों से कोई गलती हुई होगी. लेकिन एफआईपी ने शुरू से ही यह कहा कि फ्यूल की आपूर्ति अपने आप बंद हो गई थी. रंधावा ने कहा कि यह मुद्दा उन्होंने बार-बार उठाया लेकिन ध्यान नहीं दिया गया.
पायलट की मानसिक स्थिति पर उठाया सवाल
एफआईपी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि हादसे की जांच के लिए दो सेवानिवृत्त अधिकारियों को नियुक्त किया गया था, लेकिन इस तरह के हादसों के लिए विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है. उन्होंने कहा कि जांच के दौरान एक कहानी गढ़ी गई कि पायलट मानसिक रूप से स्थिर नहीं था. उन्होंने कहा कि एफआईपी ने शुरू से ही इस तरह की अटकलों का विरोध किया था. साथ ही यह भी कहा था कि जांच पायलटों के बजाय तकनीकी खामियों और विमान प्रणालियों पर केंद्रित होनी चाहिए.
सीएस रंधावा ने एआई-171 की तरह तकनीकी प्रोफाइल वाले सभी विमानों की जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि विमान के निर्माण और मुख्य प्रणालियों में बोइंग, हनीवेल और अन्य कंपनियों के पुर्जे शामिल थे. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि जांच की शुरुआत में ही इन कंपनियों को क्लीन चिट दे दी गई थी.
एफआईपी के पास पर्याप्त सबूत
रंधावा ने कहा कि एफआईपी के पास पर्याप्त सबूत हैं और उसने इस मुद्दे पर सरकार को पत्र लिखा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जांच के दौरान सामने आई महत्वपूर्ण जानकारी को समय पर सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया. उन्होंने यह भी कहा कि हादसे में पायलट की मौत होने पर बिना ठोस सबूत के ही उसको जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की गई है.
एफआईपी अध्यक्ष ने कहा कि एएआईबी के खिलाफ लड़ाई जारी है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हादसे की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि एक साल होने के बाद भी अब तक अंतिम रिपोर्ट जारी न होना कई सवाल खड़े करता है.
सीएस रंधावा ने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे और मदद को लेकर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने मांग की कि एयर इंडिया को सभी प्रभावित परिवारों को पर्याप्त सहायता प्रदान करनी चाहिए और मुआवजे के लिए हलफनामे जैसी औपचारिकताओं पर जोर देना अनुचित है.
ब्लैक बॉक्स की जांच को लेकर उठाए सवाल
उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे में एकमात्र जीवित बचे विश्वास कुमार से एएआईबी ने लंबे समय तक पूछताछ की. रंधावा ने बताया कि जांच एजेंसियों ने अगले ही दिन पायलट के परिवार से संपर्क किया था और परिवार ने ब्लैक बॉक्स की जांच को लेकर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा कि देश में डिकोडिंग सिस्टम होने के दावों के बावजूद, ब्लैक बॉक्स को विश्लेषण के लिए दो बार अमेरिका भेजा गया था. एफआईपी अध्यक्ष ने कहा कि हमारा मानना है कि मृतकों के परिवारों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए पूरी घटना की निष्पक्ष, पारदर्शी और वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए.
रिपोर्ट: मिहिर सोनी