दिल्ली के सभी जिलों से निकलने वाले इस विशाल अपशिष्ट का प्रबंधन केवल दो उपचार संयंत्रों के भरोसे है. स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के विस्तार और 2031 तक जनसंख्या वृद्धि के अनुमानों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि मौजूदा बुनियादी ढांचा भविष्य में अपर्याप्त साबित होगा.