भारत-पाकिस्तान को आजादी तो एक साथ मिली, लेकिन इसके बाद के हमारे रास्ते एकदम दीगर रहे. हमने संविधान की शपथ ली, पाकिस्तानी फौजी बूटों को पॉलिश करने लगे. हम बिना झिझक जनमत का सम्मान कर सत्ता ट्रांसफर करते रहे, पाकिस्तान दमन पर आमदा रहा. नतीजा गृह युद्ध. 1971 में पाक का अंग भंग हो गया. जिन्ना की टू-नेशन थ्योरी ढाका की गलियों में सिसक रही थी.
