धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी ईमानदार साख को ही NTA की साख मान लिया, तो उनका NEET विवाद की बली चढ़ना तय था. चंपत राय के इस्तीफे की तर्ज पर यह इस्तीफा बताता है कि निजी साख और सिस्टम में ढिलाई दो अलग-अलग बातें हैं, कसौटी पर सिस्टम को ही परखा जाता है, जहां अच्छे अच्छों की साख चंपत हो जाती है.
