
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद ने जनगणना को लेकर मुस्लिम समुदाय से अपील की है. उन्होंने कहा कि वे धर्म के कॉलम में इस्लाम और मातृभाषा के कॉलम में उर्दू ही दर्ज करें. उन्होंने इसे समुदाय की सही पहचान और भविष्य की योजनाओं से जुड़ा अहम मुद्दा बताया है.
मौलाना खालिद रशीद ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि जनगणना महज आंकड़ों की कवायद नहीं, बल्कि किसी भी समाज की असल तस्वीर सामने लाने वाली प्रक्रिया है. इसमें लापरवाही या अनदेखी भविष्य की नीतियों और योजनाओं को सीधे प्रभावित कर सकती है.
हमारी पहचान और विरासत से जुड़ा मामला
उन्होंने खासतौर पर धर्म और मातृभाषा वाले कॉलम को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मुस्लिम भाई-बहनों से मेरी साफ अपील है कि वे इन दोनों कॉलम को पूरी सावधानी से भरें. धर्म के कॉलम में इस्लाम और मातृभाषा के कॉलम में उर्दू लिखें. यह हमारी पहचान और विरासत से जुड़ा मामला है.
उर्दू एक पूरी तहजीब और सांस्कृतिक धरोहर
मौलाना ने उर्दू को सिर्फ भाषा न बताते हुए इसे एक पूरी तहजीब और सांस्कृतिक धरोहर करार दिया. उन्होंने कहा जब तक सही और सटीक आंकड़े सामने नहीं आएंगे, तब तक भाषा और समुदाय के विकास के लिए ठोस नीतियां बन पाना मुश्किल है.
जनगणना में भाग लेना हमारा कर्तव्य
उन्होंने इसे नागरिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कहा कि हर व्यक्ति का सहयोग ही यह तय करेगा कि आने वाले समय में उसकी पहचान कितनी मजबूती से दर्ज हो पाती है. इसलिए जनगणना में भाग लेना केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित करने का जरिया भी है.