
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों की भलाई और सहयोग के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति पूरी तरह जीरो टॉलरेंस की है. वे दिल्ली में Changing Dynamics in India’s Neighbourhood विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे.
अपने संबोधन में संजय सेठ ने भारत की सभ्यता के मूल विचार वसुधैव कुटुंबकम का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत करुणा और ताकत दोनों का संतुलन रखने वाला देश है. इसके साथ ही उन्होंने उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) का भी जिक्र किया और कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद यह एक ऐतिहासिक सैन्य अभियान था, जिसने आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छा शक्ति को दिखाया.उन्होंने बताया कि 1947 के बाद हुए पिछले युद्धों से अलग, ऑपरेशन सिंदूर में बड़े पैमाने पर स्वदेशी सैन्य प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की सफलता को दिखाता है.
रक्षा निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी
रक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि भारत के रक्षा उद्योग में तेजी से बदलाव आया है. उन्होंने बताया कि 2014 में रक्षा निर्यात 686 करोड़ रुपए था
2025 तक यह बढ़कर 23,622 करोड़ रुपए हो गया. 2026 के लिए लक्ष्य 29,000 करोड़ रुपए और 2029 तक लक्ष्य 50,000 करोड़ रुपए रखा गया है. उन्होंने बताया कि देश का रक्षा बजट अब बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है.
स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर जोर
संजय सेठ ने कहा कि Department of Defence Production ने स्वदेशीकरण सूची के तहत 5012 में से 3190 रक्षा उपकरण और पुर्जों का देश में निर्माण शुरू कर दिया है. इसके साथ ही रक्षा क्षेत्र में MSME सेक्टर भी तेजी से बढ़ा है और लाखों लोगों को रोजगार मिला है.
उन्होंने बताया कि भारत का स्टार्ट-अप इकोसिस्टम भी तेजी से बढ़ा है और देश अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बन चुका है.
पड़ोसी देशों के साथ मजबूत संबंध
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ मजबूत और सहयोगपूर्ण संबंध चाहता है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत का अहम व्यापारिक साझेदार है. नेपाल के साथ भारत के रिश्ते इतिहास, संस्कृति और सुरक्षा हितों से जुड़े हैं. भारत नेपाल में कई परियोजनाओं में मदद कर रहा है, जिनमें JanakpurKurtha railway link, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, ट्रॉमा सेंटर और MotihariAmlekhgunj petroleum pipeline शामिल हैं.
सैन्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर जोर
कार्यक्रम के दौरान सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर एक महत्वपूर्ण नीति दस्तावेज भी जारी किया गया. इसके साथ ही SAMADH नाम का एक AI प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया, जिसे Defence Research and Development Organisation की प्रयोगशाला Centre for Artificial Intelligence and Robotics ने विकसित किया है. यह प्लेटफॉर्म युद्ध के दौरान ड्रोन और अन्य खतरों पर रीयल-टाइम निगरानी में मदद करेगा.