पढाना बस एक काम नहीं, इबादत और प्रार्थना है

बेंगलुरु ग्रामीण, डोडाबल्लापुरा। सुबह 10:00 बजे। निर्मला ठीक उसी तरह समय पर आंगनवाड़ी पहुँचती हैं, जैसे कुछ लोग किसी इबादत या प्रार्थना के लिए पहुँचते हैं। दरवाजे का ताला ज़िद्दी है हमेशा की तरह। वह चाबी को एक बार घुमाती हैं,

Enjoy this blog? Please spread the word :)

Exit mobile version