लोकसभा में चर्चा करने और पारित करने के लिए गुरुवार को संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 तथा परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए गए. कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने कहा कि उन्होंने इस प्रस्ताव के खिलाफ प्रक्रिया संबंधी नोटिस दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन विधेयक संविधान पर सीधा हमला है और इससे दक्षिणी राज्यों के अधिकार प्रभावित होंगे.
उन्होंने कहा कि सीटों में वृद्धि से उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है इसलिए मुद्दे पर राज्यों से व्यापक परामर्श जरूरी है. बता दें कि संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) में संशोधन कर इसे 2029 तक लागू करने का प्रावधान किया जा रहा है, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा.
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों पर घमासान
दरअसल महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन से जुड़े विधेयकों का समर्थन करते हुए गुरुवार को एनडीए नेताओं ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण के लिए वर्षों से इंतजार करना पड़ा है. वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की कार्यप्रणाली देश के संघीय और लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर सकती है.
‘दक्षिणी राज्यों के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा’
बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह ने संसद भवन परिसर में विश्वास जताया कि महिला आरक्षण कानून में संशोधन को संसद में व्यापक समर्थन मिलेगा. उन्होंने कहा, महिलाएं वर्षों से इंतजार कर रही हैं और अब उनका धैर्य जवाब दे रहा है. यह विधेयक सामूहिक रूप से पारित होगा. उन्होंने परिसीमन प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की आशंकाओं को निराधार बताते हुए कहा कि इससे किसी राज्य, विशेषकर दक्षिणी राज्यों के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा.
सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी
मसौदा संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद, 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा की सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है. इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी तथा महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का आवंटन विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में क्रमिक रूप से किया जाएगा.
