
बिहार विधानपरिषद (एमएलसी) चुनाव के बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है. विधानपरिषद का टिकट नहीं मिलने से नाराज पूर्व विधायक एवं पार्टी के अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/एसटी) प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवचंद्र राम ने सोमवार को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी. यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तीफे की बात करते समय दलित नेता शिवचंद्र राम भावुक हो गए और फफक-फफक कर रोने लगे.
शिवचंद्र राम ने कहा कि एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में मैं हमेशा अपने नेता के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम करता रहा. लेकिन मेरे साथ अन्याय हुआ है. पिछले तीन दिनों से मेरे समाज के लोग पटना के विभिन्न होटलों में एकत्रित हैं. उन्हें मुझे टिकट नहीं मिलने से गहरा आघात पहुंचा है. मुझे अपने समाज का सम्मान और उसका नेतृत्व करना है. इसलिए आज मैं आरजेडी के एससी/एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद सहित पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देता हूं.
लंबे समय से विधान परिषद भेजे जाने की उम्मीद
राजापाकर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके और राज्य सरकार में मंत्री का दायित्व संभाल चुके शिवचंद्र राम लंबे समय से विधान परिषद भेजे जाने की उम्मीद लगाए हुए थे. हालांकि, पिछले दो विधानसभा चुनावों में यह सीट कांग्रेस के खाते में चली जाने के कारण वह सक्रिय राजनीति में हाशिये पर रहे हैं.
चर्चा में रोहिणी आचार्य का हालिया बयान
इस बीच, आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के हालिया बयान ने भी पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष को और उजागर कर दिया है. उनका बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले साल विधानसभा चुनाव में आरजेडी की हार के बाद यादव परिवार के भीतर मतभेदों की चर्चा लगातार होती रही है.
परिवार के भीतर मतभेदों की खबर
विधानसभा चुनाव में पराजय और परिवार के भीतर मतभेदों की खबरों के बाद रोहिणी आचार्य ने राजनीति से दूरी बनाने और अपने परिजनों से संबंध खत्म करने की घोषणा की थी. अपने पिता को किडनी दान करने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आईं रोहिणी आचार्य ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सारण संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गयी थीं.
24 सीटों पर सिमटी आरजेडी
पिछले विधानसभा चुनाव में आरजेडी की बिहार विधानसभा में 75 से घटकर 24 सीट पर सिमट गई थी. पार्टी में उभरते असंतोष और टिकट वितरण को लेकर बढ़ते विवाद ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों के बीच राजद नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.