बगदाद की सड़कों पर टैंक, आसमान में उड़ते हेलिकॉप्टर…तख्तापलट की साजिश ध्वस्त?

बगदाद की सड़कों पर टैंक, आसमान में उड़ते हेलिकॉप्टर…तख्तापलट की साजिश ध्वस्त?

पश्चिम एशिया में ईरान एक ऐसी पहेली बन गया है, जिसे शक्तिशाली अमेरिका भी सुलझा नहीं पा रहा है और ऐसा इसलिए, क्योंकि इस क्षेत्र में ईरान का दखल करीब-करीब हर पड़ोसी देश में है. हैरान करने वाली बात ये है कि, अब इससे इराक भी अछूता नहीं रहा. वहां बात सिर्फ विद्रोही गुटों तक सीमित नहीं रही. बल्कि स्थिति तख्तापलट की साजिश तक पहुंच गई. आखिर इस साजिश का पता चला कैसे?

इराक की राजधानी बगदाद में रविवार का सूरज निकलने से पहले ही सड़कों पर टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां और अलर्ट सायरन गूंजने लगे. दुनिया का एक सुरक्षित क्षेत्र माना जने वाला ग्रीनज़ोन छावनी में तब्दील हो गया. अब ये बगावत की आग है या षड्यंत्र, कहां नहीं जा सकता. इसे आधिकारिक तौर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ न्यायिक ऑपरेशन कहा जा रहा है. लेकिन अंदरखाने की कहानी का इशारा कुछ और है.

तख्तापलट की बड़ी साजिश

दावा है कि, इराक में तख्तापलट की बड़ी साजिश रची गई थी. लेकिन इस साजिश के अंजाम तक पहुंचने से ठीक पहले सेना ने इसे कुचल दिया. हालांकि ये सिर्फ दावा है, लेकिन इराक के अभेद्य ग्रीन जोन में ये संग्राम क्यों छिड़ा और असली टारगेट कौन है? इसे जानने से पहले हालात समझ लीजिए.

हथियारों से लैस बख्तरबंद गाड़ियां ग्रीन जोन में दाखिल

रविवार को सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर हथियारों से लैस बख्तरबंद गाड़ियां ग्रीन जोन में दाखिल हुईं. सुबह 6 बजकर 8 मिनट पर ग्रीन ज़ोन में गोलीबारी शुरू हो गईं. और सुबह 8 बजे इराकी सेना की एक विंग ने ग्रीन जोन के सिकमा कॉम्प्लेक्स पर धावा बोल दिया. वो कॉम्प्लेक्स और अमेरिकी दूतावास से पास है. जहां इराक के कई बड़े राजनेता और उनके परिवार रहते हैं. इसलिए पहले अमेरिकी दूतावास बंद किया गया और फिर एक ऑपरेशन शुरू हुआ.

कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई

जिसके पीछे दावा किया गया कि, कोर्ट के आदेश पर ही ये कार्रवाई की गई है. और इस कार्रवाई में टारगेट भ्रष्टाचारी नेता पर थे. लेकिन इस कार्रवाई पर सवाल इसलिए उठे, क्योंकि जिन नेताओं को ग्रीन ज़ोन से गिरफ्तार किया गया है, उनमें से कई ईरान समर्थक माने जाते हैं. इनका संबंध इराक में सक्रिय मिलिशिया गुटों से होने का दावा किया जाता है और सबसे बड़ा आरोप ये है कि गिरफ्तार किए गए यही नेता इराक में तख्तापलट की साजिश रच रहे थे. जो अपने मंसूबों में कामयाब हो पाते, उसके पहले ही स्पेशल फोर्सेस ने रातों-रात उनका खेल खत्म कर दिया.

सैन्य कार्रवाई महज एक इत्तेफाक नहीं

अमेरिकी दूतावास के बिल्कुल करीब हुई ये भारी सैन्य कार्रवाई महज एक इत्तेफाक नहीं है. ये इस बात का सबूत है कि इराक आज भी अमेरिका और ईरान की कूटनीतिक और प्रॉक्सी वॉर का सबसे बड़ा अखाड़ा बना हुआ है. भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी किए गए वारंट दरअसल उस नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश है, जो बगदाद की सत्ता को तेहरान के इशारों पर नचाना चाहता था.

हालांकि कार्रवाई अब बंद हो चुकी है. लेकिन ईरान-समर्थक धड़ों पर सीधे एक्शन का मतलब है कि आने वाले दिनों में बगदाद की सड़कों पर राजनीतिक और सैन्य तनाव भड़क सकता है. तो क्या ये इराक में किसी बड़े तूफान से पहले की खामोशी है?

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