बिहार में आज से जमीन रजिस्ट्री के बदल गए नियम, कर लें यह काम वर्ना नहीं बिकेगी प्रॉपर्टी

आज से बिहार में जमीन रजिस्ट्री के नियम में बदलाव किए गए हैं. अब 10 लाख रुपए या उससे अधिक कीमत की जमीन या मकान की रजिस्ट्री के लिए पैनकार्ड देना अनिवार्य कर दिया गया है. इसको लेकर बिहार सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने सभी जिले के अवर निबंधकों और निबंधन कार्यालयों को पत्र लिखा है, जिसका अनुपालन शुरू हो गया है. इस नियम का मकसद बड़े लेन-देन में पारदर्शिता लाना और टैक्स चोरी रोकना है.

उप निबंधन महानिरीक्षक, बिहार संजय कुमार ने पत्र लिखकर इसे सख्ती से लागू करने को कहा है. पहले 30 लाख से ऊपर के खरीद-बिक्री या एग्रीमेंट पर पैनकार्ड देने का नियम था. जिन लोगों के पास पैनकार्ड नहीं है, उसे आयकर का फॉर्म 60 और 61 भरकर देना अनिवार्य है, ताकि टैक्स चोरी को रोका जा सके. वहीं इसको लेकर पूर्णियां जिला अवर निबंधक उमा शंकर मिश्र ने बताया कि विभाग के इस नियम का पूर्णियां में अनुपालन शुरू हो चुका है. कार्यालय के बाहर इस बाबत सूचना पट्ट में आदेश की प्रति लगा दी गई है. बिना पैनकार्ड वालों के दस्तावेज का निबंधन नहीं होगा. यह नियम शहरी व ग्रामीण सभी क्षेत्रों के लिए लागू होगा.

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बता दें कि यह कदम मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने आयकर विभाग के पत्र के बाद उठाया है. आयकर विभाग ने देखा कि छोटे-छोटे जमीन, प्लॉट, दुकान जिसकी कीमत 10 लाख से ऊपर है, उसके निबंधन दस्तावेज में पैनकार्ड संग्लन नहीं किया जाता था. जिस कारण बिक्रेता या खरीदार के इनकम को विभाग ट्रेस नहीं कर पाता था. आयकर विभाग के पास ऐसे लोगों का रिकॉड भी नहीं रहता था और लगातार जमीन के खरीद-बिक्री में संलिप्त भी रहते थे. अब नए नियम से जमीन के धंधे में जुड़े लोगों की परेशानी बढ़ेगी.

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वहीं बता दें कि 50 लाख से अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए खरीदार को 1% टीडीएस काटकर आयकर विभाग को देना होता है. इसका अनुपालन न करने पर टीडीएस कटौती 20% तक बढ़ा सकती है. इन नियमों का सबसे बड़ा फायदा आम खरीदारों को मिलेगा, जो अक्सर जमीन विवादों से डरते हैं. डिजिटल रिकॉर्ड और सख्त सत्यापन से फर्जी बिक्री और डुप्लीकेट रजिस्ट्री के मामले घटेंगे. सरकार को भी टैक्स चोरी और काले धन पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी.

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