बुशहर परमाणु प्लांट पर इजराइली हमलें… हमारा ईरान की न्यूक्लियर सेक्टर लीडरशिप से संपर्क टूटा- रूसी कंपनी

बुशहर परमाणु प्लांट पर इजराइली हमलें… हमारा ईरान की न्यूक्लियर सेक्टर लीडरशिप से संपर्क टूटा- रूसी कंपनी

रूस की न्यूक्लियर कंपनी रोसाटॉम के डायरेक्टर जनरल एलेक्सी लिखाचेव मंगलवार को कहा कि दक्षिणी ईरान में बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के आस-पास हुए हवाई हमलों की वजह से वहां ऑपरेशन रोक दिया गया है और करीब 639 रूसी लोग अभी भी प्लांट में हैं. बता दें, कंपनी प्लांट में मुख्य कॉन्ट्रैक्टर रही है, जो अभी अपनी दूसरी और तीसरी पावर यूनिट बना रही है. लेकिन आज के हमलों के बाद एलेक्सी लिखाचेव ने कहा कि कंपनी का देश के न्यूक्लियर सेक्टर के लीडरशिप से कम्युनिकेशन टूट गया है और और देश में दूसरे न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन की स्थिति अभी भी साफ नहीं है.

लिखाचेव ने बताया कि हमलों के बाद भी रोसाटॉम प्लांट में ईरानी अधिकारियों के साथ काम करना जारी रखे हुए है. उन्होंने आगे कहा, “स्टेशन निश्चित रूप से खतरे में है, क्योंकि स्टेशन के फिजिकल एरिया से किलोमीटर दूर से ही धमाके सुने जा रहे हैं. वे स्टेशन पर नहीं, बल्कि वहां मौजूद मिलिट्री इंस्टॉलेशन पर निशाना साध रहे हैं, लेकिन खतरा साफ तौर पर बढ़ रहा है.”

रूसी कंपनी ने निकाला गैर जरूरी स्टाफ

रोसाटॉम के हेड ने कहा कि पावर प्लांट में हालात अभी भी कंट्रोल में हैं. शनिवार को रोसाटॉम ने कहा कि उसने ईरान से लगभग 100 लोगों को निकाला है, जिसमें गैर-जरूरी स्टाफ और कर्मचारियों के बच्चे शामिल हैं. लिकाचेव के मुताबिक कंपनी जब हालात ठीक होंगे तो फैसिलिटी से और 150-200 लोगों को निकालने का प्लान बना रही है.

लिकाचेव ने कहा कि प्लांट में अभी 70 टन न्यूक्लियर फ्यूल और 210 टन से ज्यादा खत्म हो चुका फ्यूल समेत टूटने वाले सामान का एक बड़ा स्टॉक है. उन्होंने चेतावनी दी कि स्टॉक पर कोई भी हमला कम से कम इलाके लेवल की बड़ी घटना का नतीजा होगा.

ईरान के एटॉमिक प्रोग्राम में रूस की भूमिका

रूस ने ईरान के सिविलियन एटॉमिक प्रोग्राम में खासकर बुशहर प्लांट में अहम भूमिका निभाई है. पावर प्लांट का कंस्ट्रक्शन 1970 के दशक के बीच में एक वेस्ट जर्मन कंपनी ने शुरू किया था, लेकिन 1980 में इस्लामिक क्रांति के बाद इसे रोक दिया गया था. इस प्रोजेक्ट को 1990 के दशक में रोसाटॉम ने फिर से शुरू किया और रूसी न्यूक्लियर एनर्जी की बड़ी कंपनी ने 2010 के दशक की शुरुआत में प्लांट का पहला पावर यूनिट लॉन्च किया.

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