भारत की वैश्विक हैसियत में आया बड़ा बदलाव, राजनाथ सिंह बोले- हमारा नजरिया ध्यान से सुनती है दुनिया

भारत की वैश्विक हैसियत में आया बड़ा बदलाव, राजनाथ सिंह बोले- हमारा नजरिया ध्यान से सुनती है दुनिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, पिछले 12 वर्षों में भारत का सफर कमियों से आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से ‘विकसित भारत’ के निर्माण की ओर बढ़ा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में कमियों को दूर किया, अवसरों का विस्तार किया और काम करने के तरीके (वर्क कल्चर) को बदला. दूसरे कार्यकाल में, सरकार ने उम्मीदों को उपलब्धियों में बदला और देश को मजबूती से आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ाया.

उन्होंने आगे कहा कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में ‘सुधार, प्रदर्शन, बदलाव’ (Reform, Perform, Transform) की नीति के ज़रिए ‘विकसित भारत’ की मजबूत नींव रख रही है और उन्हें पूरा भरोसा है कि चौथे कार्यकाल में दुनिया एक विकसित भारत का उदय देखेगी.

12 सालों में देश में आए बड़े बदलाव

पिछले 12 सालों में देश में आए बदलावों की मुख्य बातों पर जोर देते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि जब 2014 में ‘मेक-इन-इंडिया’ शुरू किया गया था, तो कुछ लोगों ने इसे नाकाम बताया था, लेकिन इस स्कीम ने सफलता के नए मानक स्थापित किए और आज भी ऐसा कर रही है. उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत की हैसियत में जबरदस्त बदलाव आया है. पहले दुनिया हमारी आवाज पर ज़्यादा ध्यान नहीं देती थी, लेकिन आज वह वैश्विक मुद्दों पर भारत के नज़रिए को ध्यान से सुनती है.

उन्होंने आगे कहा कि 2021 में शुरू किए गए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ को लेकर शुरुआती संदेह के बावजूद, देश ने पिछले साल अपने सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन किया. यह ‘प्लग-एंड-प्ले’ इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल पर आधारित सेमीकंडक्टर पार्क बनाने की वजह से संभव हुआ.

रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा

राजनाथ सिंह ने आगे बताया कि वित्त वर्ष (FY) 2025-26 में सालाना रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपए के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2014-15 के आंकड़े से तीन गुना ज़्यादा है. उन्होंने कहा कि रक्षा निर्यात आज रिकॉर्ड 38,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गया है, जो वित्त वर्ष 2013-14 में 686 करोड़ रुपए था. यह लगभग 57 गुना बढ़ोतरी को दिखाता है और ‘मेक-इन-इंडिया’ प्लेटफॉर्म पर दुनिया के भरोसे को रेखांकित करता है.

भारत की डिजिटल क्रांति का जिक्र

रक्षा मंत्री ने ‘मेक-इन-इंडिया’ के तहत मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट, देश में बनी ट्रेनों (लोकोमोटिव) के प्रोडक्शन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का जिक्र करते हुए मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की बड़ी तरक्की पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने भारत की डिजिटल क्रांति का खास तौर पर जिक्र करते हुए बताया कि अप्रैल में कुल 29 लाख करोड़ रुपए मूल्य के 22.35 अरब UPI ट्रांजैक्शन हुए और इस सुविधा का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रहा है.

6G के विकास की दिशा में भी प्रयास

उन्होंने देश में ‘मेक-इन-इंडिया’ के तहत विकसित 5G टेक्नोलॉजी को तेजी से लागू करने के बारे में भी बात की और इस बात पर ज़ोर दिया कि 6G के विकास की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं. राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि 2014 से पहले, कल्याणकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाने में भ्रष्टाचार और लीकेज को आम तौर पर अपरिहार्य माना जाता था, जिससे लाभार्थियों तक लाभ नहीं पहुंच पाता था.

लाभार्थियों के खातों में 51 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर

उन्होंने बताया कि सरकार ने ‘JAM ट्रिनिटी’ (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, जन धन, आधार और मोबाइल ट्रिनिटी) के जरिए इस चुनौती का समाधान किया, जिससे लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे 51 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर करना संभव हुआ और साथ ही लगभग 4.3 लाख करोड़ रुपए की लीकेज को रोका जा सका. उन्होंने गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) के सफल कार्यान्वयन पर भी प्रकाश डाला और कहा कि शुरुआती चिंताओं के बावजूद, इसने केंद्र और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच समन्वय को मजबूत करके सहकारी संघवाद (cooperative federalism) के एक मॉडल के रूप में अपनी पहचान बनाई है.

रक्षा मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाना और नक्सलवाद को खत्म करने की लगातार कोशिशें सरकार के उस संकल्प की बेहतरीन मिसाल हैं, जिसके तहत उन मुद्दों को सुलझाया गया जिन्हें कभी हल नहीं किया जा सकने वाला माना जाता था. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार उद्यमियों को रोज़गार पैदा करने वाले और संपत्ति बनाने वाले के तौर पर देखती है.

दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

‘जन विश्वास’ सुधार जैसी पहलों से कारोबार करना आसान हुआ है और भारत के दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में प्रगति में योगदान मिला है. उन्होंने कहा, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बन गया है. पिछले 12 सालों में स्टार्ट-अप की संख्या 500 से बढ़कर 2 लाख से ज़्यादा हो गई है, और यूनिकॉर्न की संख्या चार से बढ़कर 125 हो गई है.

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत की संस्कृति ही उसकी पहचान, एकता और राष्ट्रीय चेतना की नींव है, और सभ्यता, संस्कृति व विरासत को बचाए रखने के साथ-साथ सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान दिया गया है. उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को फिर से जीवित करने और खोई हुई विरासत को बहाल करने की कोशिशें की जा रही हैं.

इसके लिए काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक और मां कामाख्या दिव्य लोक परियोजना जैसी पहल की गई हैं. साथ ही, संसद में ‘सेंगोल’ की स्थापना, ‘वंदे मातरम’ की गरिमा को बहाल करना, प्राचीन कलाकृतियों की वापसी और प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण जैसे कदम भी उठाए गए हैं.

सटीकता और विश्वसनीयता सबसे बड़ी चुनौती

रक्षा मंत्री ने ‘कम्युनिकेटिव अबंडेंस’ (सूचनाओं की भरमार) के मौजूदा दौर में मीडिया की भूमिका को पहले से कहीं ज़्यादा अहम बताते हुए कहा कि आज चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि उसकी सटीकता और विश्वसनीयता है. उन्होंने बताया कि ‘पत्रकारिता’ पर भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकी तरक्की का असर पड़ा है, लेकिन ये इंसानी रचनात्मकता और बुद्धि से आगे नहीं निकल पाएंगी.

उन्होंने कहा, पत्रकारिता की भविष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह AI की क्षमताओं और इंसानी संवेदना के बीच कितना अच्छा तालमेल और संतुलन बनाती है. जहां AI पत्रकारिता को तेज़ और ज़्यादा सटीक बनाएगा, वहीं इमोशनल इंटेलिजेंस यह पक्का करेगा कि वह मानवीय और विश्वसनीय बनी रहे.

समाज और रक्षा बलों के मनोबल पर बुरा असर

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि पत्रकारिता की असली ताकत सिर्फ जानकारी फैलाने में नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने, सच को सामने लाने और लोकतंत्र को मजबूत करने में है. उन्होंने कहा कि गलत जानकारी समाज और रक्षा बलों के मनोबल पर बुरा असर डालती है. उन्होंने आगे कहा कि पत्रकारिता में सबसे पहले खबर देना भले ही जरूरी हो, लेकिन सही खबर फैलाना उससे भी ज़्यादा अहम है.

उन्होंने कहा कि खासकर जब मामला रक्षा बलों, राष्ट्रीय सुरक्षा या देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वालों के सम्मान से जुड़ा हो, तो हर शब्द राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी का विषय बन जाता है. मीडिया को हमेशा सटीकता, निष्पक्षता और तटस्थता के मूल्यों को बनाए रखना चाहिए.

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