भारत के खिलाफ विदेशी साजिश नाकाम, NIA जांच के बाद कोर्ट ने 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों को भेजा जेल

भारत के खिलाफ विदेशी साजिश नाकाम, NIA जांच के बाद कोर्ट ने 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों को भेजा जेल

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पिछले महीने एक अमेरिकी नागरिक और 6 यूक्रेनियों को गिरफ्तार किया था. सोमवार को इन लोगों को अब 30 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. आरोप है कि ये पर्यटक वीजा पर भारत आए और फिर मिजोरम में घुस गए, जो एक प्रोटेक्टेड एरिया है. इसके बाद, वे म्यांमार में घुसे और एथनिक वॉर ग्रुप से कॉन्टैक्ट किया. वहीं, इससे पहले तक ये NIA की कस्टडी में थे, जहां इनसे पूछताछ की जा रही थी.

बताया जा रहा है कि इन लोगों पर बेहद संगीन अरोप लगे हैं, जिनमें से एक आरोप भारत में विद्रोही गुटों को उकसाने और ट्रेनिंग देने का भी है. दरअसल, NIA का आरोप है कि उन्हें म्यांमार में ट्रेनिंग दी गई थी और वे एथनिक वॉर ग्रुप को ट्रेनिंग दे रहे थे. ये ग्रुप भारत में विद्रोही ग्रुप से जुड़े हैं. यह भी आरोप है कि वे भारत के रास्ते यूरोप से ड्रोन का एक बड़ा कंसाइनमेंट लाए थे. फिलहाल सभी आरोपियों को पूछताछ के बाद 30 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. आरोपियों की पहचान एनआईए की गिरफ्तार में आए यूक्रेन के नागरिकों के नाम हर्बा पेट्रो, स्लिवियाक टारस, इवान सुकमनोवस्की, स्टीफन मारियन, होंचारुक मकसीम और कामिनिस्की विक्टर के रूप में हुई है.

अलग-अलग तारीखों में पर्यटक वीजा पर भारत में घुसे

बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कोर्ट में जो हलफनामा दिया है, उसके अनुसार, आरोपी अलग-अलग तारीखों में पर्यटक वीजा पर भारत में घुसे और उसके बाद ये विमान से गुवाहाटी गए. इसके बाद ये वहां से बिना वैध दस्तावेजों जैसे रेस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट या प्रोटेक्टेड एरिया परमिट के मिजोरम गए.


वहां से सातों आरोपी गैरकानूनी तरीके से म्यांमार में घुसे, जहां इनका पहले से म्यांमार के जातीय हथियारबंद समूह (EAGs) को ड्रोन की ट्रेनिंग देने का शेड्यूल था. दावा है कि यही समूह भारत में चल रहे आतंकी संगठनों की मदद करता है.

पकड़े गए यूक्रेनी नागरिकों के नाम

जांच में सामने आया है कि पकड़ा गया अमेरिकी नागरिक वैन डाइक बाल्टीमोर का है. उसकी वेबसाइट के अनुसार, वह सैनिक रहा है और वह इंटरनेशनल बिजनेसमैन, युद्ध की रिपोर्टिंग करने वाला पत्रकार, लेखक ह. उसने दावा किया है कि उसने लीबिया में क्रांति के दौरान जेल में भी रहा था. सूत्रों से पता चला है कि अमेरिकी नागरिक ही बाकी लोगों को नेतृत्व कर रहा था. NIA के मुताबिक इन्हें म्यांमार में प्रशिक्षण दिया गया और खुद ट्रेनिंग लेने के बाद ये लोग जातीय जंग छेड़ने वाले समूहों को प्रशिक्षित कर रहे थे.

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