इस शुक्रवार (13 फरवरी) को होने जा रही कैबिनेट की बैठक बेहद ख़ास और भावनात्मक होगी. यह बैठक शाम चार बजे साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में होगी. इस इमारत में होने वाली यह कैबिनेट की अंतिम बैठक होगी, क्योंकि इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय नई इमारत सेवा तीर्थ में शिफ्ट हो जाएगा.
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह एक सांकेतिक बैठक होगी जो एक तरह से पिछले करीब 80 वर्षों से साउथ ब्लॉक से काम कर रहे प्रधानमंत्री कार्यालय के नए पते पर शिफ्ट होने से पहले की जाएगी. यह बैठक 80 सालों से सत्ता के केंद्र रहे साउथ ब्लॉक को सम्मानजनक विदाई देने के लिए आयोजित की जा रही है.
पहली बैठक 15 अगस्त 1947 को हुई
जानकारी के मुताबिक साउथ ब्लॉक में पहली कैबिनेट बैठक पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में 15 अगस्त 1947 को हुई थी. वहीं अब 13 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यहां अंतिम कैबिनेट बैठक बुलाई गई है. जाहिर है ये पल राजनीति के लिहाज से बेहद इमोशनल भी होगा. इस इमारत ने भारत की राजनीति के बदलते स्वरूप को देखा और उसकी गवाह भी बनी.
नया प्रधानमंत्री कार्यालय सेवा तीर्थ
विजय चौक के नजदीक नया प्रधानमंत्री कार्यालय सेवा तीर्थ बन कर तैयार है, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस है. ये करीब 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है.करीब 1,189 करोड़ की लागत से विकसित इस परिसर में तीन मुख्य इमारतें हैं-सेवा तीर्थ-1 (PMO मुख्यालय), सेवा तीर्थ-2 (कैबिनेट सचिवालय) और सेवा तीर्थ-3 (NSA एवं राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय).
इस महीने शिफ्ट हो सकते हैं पीएम
बताया जा रहा है कि इसी महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने नए कार्यालय में शिफ्ट हो सकते हैं. वैसे कैबिनेट की बैठकें प्राय: प्रधानमंत्री निवास सात लोक कल्याण मार्ग पर होती आई हैं जहां कैबिनेट की बैठकों के लिए एक अलग कक्ष बनाया गया है. लेकिन सेवा तीर्थ में अब कैबिनेट मीटिंग के लिए एक विशेष हॉल तैयार किया गया है. इसी के साथ नया प्रधानमंत्री आवास भी बनाया जा रहा है, जो संसद भवन के काफी नजदीक है. इस शिफ्टिंग का मकसद प्रधानमंत्री के मूवमेंट को सुगम बनाना और आम लोगों को होने वाली ट्रैफिक संबंधी परेशानियों को कम करना है.
वहीं खाली होने वाले साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को सार्वजनिक उपयोग के लिए संग्रहालयों में तब्दील करने की योजना है. नॉर्थ ब्लॉक में संग्रहालय बनाने का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है, जिससे आने वाली पीढ़ियां भारत की प्रशासनिक विरासत को करीब से देख सकेंगी.
