
Umaria School Accident: मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के अखड़ार गांव है. यहां शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में छत का प्लास्टर गिरने से 12वीं कक्षा का एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि दो अन्य छात्रों को मामूली चोटें आईं. हैरानी की बात यह है कि 24 जुलाई को हुई इस घटना की जानकारी न तो जिला शिक्षा विभाग को दी गई और न ही प्रशासन को. स्कूल प्रबंधन ने घायल छात्रों का इलाज कराकर मामले को दबाने की कोशिश की.
घटना जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित स्कूल की है. घायल छात्र लवकुश गुप्ता ने बताया कि वह बाथरूम से लौटकर कक्षा में जा रहा था, तभी अचानक छत का बड़ा हिस्सा उसके ऊपर आ गिरा. हादसे में उसके सिर, कंधे और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं. दो अन्य छात्रों को भी मामूली चोटें लगीं.
प्राचार्य ने खुद कराया इलाज, अधिकारियों को नहीं दी सूचना
घटना के बाद स्कूल के प्रभारी प्राचार्य घायल छात्र को इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए और उपचार का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी भी ली. छात्र के परिजन विकास गुप्ता ने बताया कि प्राचार्य ने दो बार कटनी ले जाकर उसका इलाज कराया और आगे भी इलाज का खर्च उठाने का भरोसा दिया. इसी वजह से मामला बाहर नहीं आया और शिक्षा विभाग भी घटना से अनजान रहा.
जांच के बाद सामने आएंगे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
घटना वाले कक्षा-कक्ष की छत से करीब पांच फीट से अधिक हिस्से का प्लास्टर टूटकर गिरा. हादसे के बाद कक्षा को दूसरे कमरे में स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन मलबा अब भी कमरे में पड़ा हुआ है. बताया जा रहा है कि स्कूल भवन का निर्माण करीब पांच वर्ष पहले हुआ था. ऐसे में भवन की गुणवत्ता और निर्माण कार्य में लापरवाही पर भी सवाल उठ रहे हैं.
जिला शिक्षा अधिकारी बोले- सूचना छिपाना गंभीर चूक
जिला शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह बरकड़े ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली. उन्होंने बताया कि प्राचार्य से बात करने पर घटना की पुष्टि हुई है. अधिकारी के मुताबिक, ऐसी घटना होने पर तत्काल विभाग को सूचना देना जरूरी था. उन्होंने प्राचार्य को घायल छात्र के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं और भवन की स्थिति की जांच कराने की बात कही है.
निर्माण एजेंसी की भूमिका पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने स्कूल भवन के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य सही तरीके से हुआ होता तो महज पांच साल में छत का प्लास्टर नहीं गिरता. लोगों ने मांग की है कि भवन निर्माण में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में छात्रों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो.
रिपोर्ट- सुरेंद्र त्रिपाठी