पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल विवाद को लेकर राजनीति तेज हो गई है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि दार्जिलिंग यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा व्यक्त की गई चिंताएं देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के प्रति प्रशासनिक संवेदनशीलता और सम्मान की घोर कमी को दर्शाती हैं. जब खुद राष्ट्रपति को व्यवस्थाओं को लेकर खेद व्यक्त करना पड़ा, तो इससे संबंधित अधिकारियों के आचरण और तैयारियों पर गंभीर सवाल उठते हैं.
धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर लिखा कि पश्चिम बंगाल सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि ऐसी स्थिति कैसे उत्पन्न हुई. राष्ट्रपति पद के प्रति अनादर या लापरवाही राष्ट्र की गरिमा को ठेस पहुंचाती है. उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों की पवित्रता राजनीति से ऊपर रहनी चाहिए. आदिवासी समुदायों को सम्मानित करने के लिए आयोजित अवसरों में उचित समन्वय, सावधानी और सम्मान का भाव होना चाहिए, न कि राष्ट्रपति को निराशा व्यक्त करने के लिए मजबूर होना पड़े.
The concerns expressed by Honble President Droupadi Murmu ji @rashtrapatibhvn during her visit to Darjeeling reflect a deeply unfortunate lapse in administrative sensitivity and respect for the highest constitutional office of the country. When the President herself is compelled https://t.co/GbbIRZjPsd
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) March 7, 2026
इन नेताओं ने भी ममता सरकार पर साधा निशाना
बता दें कि धर्मेंद्र प्रधान के अलावा गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के सीएम योगी से लेकर बीजेपी के तमाम दिग्गज नेताओं ने राष्ट्रपति मुर्मू को सिलीगुड़ी दौरे के दौरान अपर्याप्त व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल में गंभीर चूक पर चिंता जताई और ममता सरकार की आलोचना की. बीजेपी नेताओं की यह प्रतिक्रिया राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा राज्य में आयोजित संथाल सम्मेलन के स्थल में बदलाव और उनकी यात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके मंत्रियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त करने के बाद आई है.
TMC ने किया राष्ट्रपति का अपमान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार आज अपने अराजक व्यवहार से और भी निचले स्तर पर गिर गई. उसने प्रोटोकॉल की पूरी तरह अनदेखी कर राष्ट्रपति का अपमान किया. उन्होंने कहा कि तृणमूल सरकार न केवल नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का मनमाने ढंग से उल्लंघन करती है, बल्कि राष्ट्रपति को भी नहीं बख्शती. शाह ने कहा कि भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान, वह भी आदिवासी बहनों और भाइयों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में, राष्ट्र और उन मूल्यों का अपमान है जो भारत के संवैधानिक लोकतंत्र की पहचान हैं.
राष्ट्रपति के साथ हुआ व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रति पश्चिम बंगाल में हुआ व्यवहार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और अक्षम्य है. यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, मातृशक्ति और जनजातीय समाज की अस्मिता का अपमान है. राष्ट्रपति का पद भारतीय गणतंत्र की सर्वोच्च संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है. इस पद के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार की असंवेदनशीलता अस्वीकार्य है.
संथाल संस्कृति और राष्ट्रपति के प्रति TMC का यह दुराग्रह उनके राजनीतिक अहंकार और ओछी मानसिकता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है. संपूर्ण देश इस कृत्य से आहत है. पश्चिम बंगाल सरकार को अपने इस अमर्यादित आचरण के लिए देश से अविलंब सार्वजनिक क्षमा मांगनी चाहिए.
नीतीन गडकरी ने टीएमसी पर साधा निशाना
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नीतीन गडकरी ने टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार का आचरण संवैधानिक मूल्यों और स्थापित प्रोटोकॉल की घोर अवहेलना को दर्शाता है. भारत के राष्ट्रपति, जो हमारे देश के सर्वोच्च संवैधानिक प्राधिकारी हैं, उनका अपमान न केवल मर्यादा का उल्लंघन है, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा पर भी आघात है.
यह घटना हमारे आदिवासी भाई-बहनों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में घटी, इसे और भी दुखद बनाती है. संवैधानिक मर्यादा के प्रति ऐसा अहंकार और उदासीनता अस्वीकार्य है और लोकतंत्र को महत्व देने वाले प्रत्येक नागरिक द्वारा इसकी स्पष्ट रूप से निंदा की जानी चाहिए.
The conduct of the TMC Government in West Bengal today reflects a deeply disturbing disregard for constitutional values and established protocol.
The humiliation of the Honble President of India, the highest constitutional authority of our nation, is not merely a breach of
— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) March 7, 2026
आदिवासी समाज की भावनाओं की अवहेलना
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ममता सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि संथाल समुदाय को उनके अपने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से दूर रखने वाली व्यवस्थाओं का चयन करके, टीएमसी सरकार ने न केवल आदिवासी समाज की भावनाओं की अवहेलना की है, बल्कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है. भारत के राष्ट्रपति के प्रति सम्मान केवल औपचारिक शिष्टाचार नहीं है, बल्कि यह संविधान और उसके द्वारा प्रतिनिधित्व की जाने वाली जनता के प्रति हमारे सामूहिक सम्मान को दर्शाता है. भारत की जनता, विशेष रूप से हमारे आदिवासी भाई-बहन, इस असंवेदनशील आचरण और अपनी संस्कृति और राष्ट्रपति पद के इस अनावश्यक अपमान के लिए जवाब के हकदार हैं.
By choosing arrangements that distanced the Santhal community from their own international gathering, the TMC Government has not only disregarded the sentiments of tribal society but also undermined the dignity of the highest constitutional office of the nation.
Respect for the
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) March 7, 2026
ममता सरकार का अलोकतांत्रिक चरित्र उजागर
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार ने एक बार फिर अपना अलोकतांत्रिक चरित्र उजागर कर दिया है. संथाल समुदाय की समृद्ध आदिवासी विरासत के प्रति दिखाई गई असंवेदनशीलता अत्यंत निंदनीय है. इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि भारत के सर्वोच्च संवैधानिक प्राधिकरण, राष्ट्रपति की गरिमा का घोर अपमान किया गया है. इस घटना पर राष्ट्रपति द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा अत्यंत दुखद और गंभीर चिंता का विषय है.
सिंधिया ने कहा कि ऐसा आचरण टीएमसी सरकार के अहंकार और राजनीतिक शत्रुता को दर्शाता है. हमारे आदिवासी समुदाय के कार्यक्रम में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान करना अस्वीकार्य है और लोकतंत्र तथा हमारे आदिवासी समुदायों की गरिमा में विश्वास रखने वाले प्रत्येक नागरिक के लिए अत्यंत पीड़ादायक है. इतने गंभीर मामले में राज्य सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए और देश की जनता के समक्ष अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए.
