मालदा की घटना अपवाद नहीं, ममता सरकार पर भड़के धर्मेंद्र प्रधान, बोले- TMC की राजनीति का अंत करीब

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि मालदा की घटना कोई अपवाद नहीं है, यह ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में व्यवस्था के पूर्ण पतन का लक्षण है.

उन्होंने कहा कि सात न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा गया, उन्हें भोजन और पानी तक नहीं दिया गया. यह राज्य की सत्ता के पूर्ण पतन को दर्शाता है. इसमें मालदा-मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा (हिंदू परिवारों का विस्थापन और हरगोबिंदो और चंदन दास की निर्मम हत्या) को भी जोड़ दें.

भय फैलाने की राजनीति का अंत

यह सब राज्य-नियंत्रित प्रशासनिक तंत्र के तहत हुआ है. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी इसे ‘राजनीतिक नहीं’ कहकर टाल दिया गया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद इसमें राजनीति को घसीट लिया गया. पश्चिम बंगाल इस पर नजर रख रहा है और टीएमसी के गुंडों द्वारा फैलाई जा रही भय फैलाने की राजनीति का अंत निकट है.

मालदा मामले की जांच NIA को सौंपी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव की जांच गुरुवार को एनआईए को सौंप दी. दिल्ली में चुनाव आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि एनआईए की एक टीम शुक्रवार को राज्य में मौजूद रहेगी.

पश्चिम बंगाल को सबसे अधिक ध्रुवीकरण वाला राज्य बताते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हमले पर प्रशासन की पूर्ण विफलता और निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी जताई और सीबीआई या एनआईए से जांच कराए जाने का निर्देश दिया.

राज्य प्रशासन की विफलता उजागर

चुनाव आयोग ने दो अप्रैल को एनआईए को लिखे पत्र में कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उसे बुधवार की घटना की जांच करने का निर्देश दिया. घेराव की घटना की कड़ी निंदा करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह घटना राज्य प्रशासन की पूर्ण विफलता को भी उजागर करती है और न्यायिक अधिकारियों को धमकाने का न सिर्फ एक बेशर्म प्रयास था, बल्कि यह शीर्ष अदालत के अधिकार को चुनौती देने के बराबर भी था.

क्या है पूरा मामला?

पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होंगे. यह घटना मालदा जिले के कालियाचक इलाके में एसआईआर कवायद के दौरान हुई जब असामाजिक तत्वों ने बुधवार को एक खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कार्यालय में अपराह्न साढ़े तीन बजे से सात न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया. अधिकारियों ने बताया कि बुधवार आधी रात के आसपास सुरक्षा बलों ने उन न्यायिक अधिकारियों को मुक्त कराया, जिनका घेराव किया गया था.

Enjoy this blog? Please spread the word :)

Exit mobile version