मालदा के आमों की इटली और मिडिल ईस्ट में भी डिमांड, दुनिया तक पहुंच रही ‘फलों के राजा’ की मिठास

मालदा के आम उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर, ज़िला प्रशासन ने ICAR-CISH KVK मालदा और अन्य अहम सहयोगियों के साथ मिलकर बेहतरीन क्वालिटी वाले आमों का अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में निर्यात सफलतापूर्वक शुरू किया है. इससे ग्लोबल बागवानी के नक्शे पर जिले की स्थिति और मजबूत हुई है. अमृतरी, इंग्लिश बाजार से 1,500 किलोग्राम बेहतरीन क्वालिटी वाले आम्रपाली आमों की एक खेप संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को निर्यात के लिए रवाना की गई.

इसके अलावा, GAP-आधारित आम क्लस्टर के तहत उगाए गए लखनभोग और निर्यात-योग्य अन्य बेहतरीन किस्मों को भी मिलान (इटली) और मिडिल ईस्ट के कई देशों सहित अंतरराष्ट्रीय जगहों पर भेजा गया. कुल मिलाकर, लगभग 6 मीट्रिक टन आमों का निर्यात किया गया है.

‘आमार मालदा’ पहल शुरू

यह ध्यान देने वाली बात है कि मालदा ज़िला प्रशासन ने ‘आमार मालदा’ पहल शुरू की है, जिसके तहत आम से जुड़ी सभी गतिविधियों को एक ही मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है. इन कोशिशों के अच्छे नतीजे मिल रहे हैं. यह कामयाबी ज़िला प्रशासन द्वारा ICAR-सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (CISH) के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), मालदा के साथ मिलकर बढ़ावा दी गई GAP-आधारित आम क्लस्टर पहल के तहत हासिल की गई है.

ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिटिव बने आम

क्लस्टर से जुड़े किसानों ने वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ‘अच्छे कृषि अभ्यास’ (GAP) अपनाए. इनमें फलों की बैगिंग, कीट और बीमारी का इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट, संतुलित पोषक तत्वों का इस्तेमाल, कैनोपी मैनेजमेंट, बाग की सफाई और फसल कटाई से पहले और बाद में बेहतर हैंडलिंग शामिल थी. इन तरीकों से कड़े अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी स्टैंडर्ड्स का पालन सुनिश्चित हुआ, जिससे मालदा के आम ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिटिव बन गए.

वैज्ञानिक तरीके से आम की खेती

इस मौके पर मालदा मैंगो मर्चेंट एसोसिएशन के हेड उज्ज्वल साहा ने कहा, एक्सपोर्ट में मिली यह कामयाबी GAP प्रोटोकॉल के तहत वैज्ञानिक तरीके से आम की खेती के बड़े असर को दिखाती है. मालदा के किसानों ने क्वालिटी प्रोडक्शन के लिए गजब की अनुकूलन क्षमता और कमिटमेंट दिखाई है, जिससे उनके उत्पाद के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए रास्ते खुले हैं.

संस्थागत तालमेल का जमीनी स्तर पर नतीजा

मालदा के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, IAS राजनवीर सिंह कपूर ने तालमेल वाली गवर्नेंस और किसानों पर केंद्रित पहलों की भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि यह कामयाबी इस बात का सबूत है कि संस्थागत तालमेल जमीनी स्तर पर क्या नतीजे दे सकता है. जिला प्रशासन एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड खेती को बढ़ावा देने और यह पक्का करने के लिए कमिटेड है कि हमारे किसानों को बेहतर मार्केट एक्सेस और ज़्यादा कमाई के मौके मिले. मालदा के आमों में ग्लोबल स्तर पर बहुत क्षमता है, और हम ‘आमार मालदा’ के तहत ऐसी पहलों को और आगे बढ़ाना जारी रखेंगे.

ICAR-CISH KVK, मालदा के साइंटिस्ट डॉ. नायक ने कहा कि सिस्टमैटिक ट्रेनिंग, फील्ड-लेवल पर डेमो और लगातार मदद के जरिए, हम किसानों को एक्सपोर्ट की कड़ी ज़रूरतों को पूरा करने और मालदा के आमों को ग्लोबल खरीदारों के लिए एक भरोसेमंद, प्रीमियम प्रोडक्ट के तौर पर स्थापित करने में मदद कर पाए हैं.

मालदा का एक्सपोर्ट इकोसिस्टम

एक्सपोर्ट की यह सफल पहल मालदा के एक्सपोर्ट इकोसिस्टम को बेहतर बनाने, किसानों की कमाई बढ़ाने और ज़िले को भारत की एग्री-एक्सपोर्ट ग्रोथ स्टोरी में एक अहम योगदानकर्ता के तौर पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

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