पाकिस्तान में बढ़ती हिंसा और अलगाव की आवाजों के बीच मौलाना फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को 1971 की हार और भारत के सामने आत्मसमर्पण की याद दिलाई. उन्होंने बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पीओके के हालात पर सवाल उठाते हुए चेताया कि लंबे समय तक खून-खराबा जारी रहा तो देश की भौगोलिक स्थिति में बदलाव आ सकता है.
