कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि मुस्लिम रीति-रिवाजों से शादी करने वाली हिंदू महिला भी गुजारा भत्ता पाने की हकदार है. अदालत ने साफ किया कि जब तक किसी सक्षम अदालत द्वारा विवाह को अवैध घोषित नहीं किया जाता, तब तक पति को भरण-पोषण देना होगा. हाई कोर्ट ने पश्चिम बर्द्धमान की मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को बहाल कर दिया, जिसमें महिला को 5 हजार रुपये और उसके नाबालिग बेटे को 4 हजार रुपये अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था.
