यूपी ATS का बड़ा एक्शन, 5 दिन की रिमांड पर चारों आतंकी, बड़ी साजिश नाकाम, निशाने पर थे कई शहर

यूपी ATS का बड़ा एक्शन, 5 दिन की रिमांड पर चारों आतंकी, बड़ी साजिश नाकाम, निशाने पर थे कई शहर

पाकिस्तानी हैंडलर्स के निर्देश पर देश में दहशत फैलाने की गतिविधियों में शामिल चार आरोपियों को उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार अभियुक्तों के कब्जे से टीम ने 7 स्मार्टफोन बरामद किए हैं. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि एटीएस ने आरोपियों की पांच दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड हासिल किया है.

अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश ने बताया कि एटीएस ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों, वाहनों और रेलवे सिग्नल बॉक्स में आगजनी जैसी राष्ट्रविरोधी साजिश रचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. उनके कब्जे से सात स्मार्टफोन बरामद किए गए हैं, जिनमें अहम साक्ष्य मिलने की संभावना है.

गिरफ्तार आरोपियों की हुई पहचान

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मेरठ के परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के अगवानपुर निवासी साकिब उर्फ डेविल (25), अरबाब (20) तथा गौतम बुद्ध नगर के छपरौला निवासी विकास गहलावत उर्फ रौनक (27) और लोकेश उर्फ पपला पंडित उर्फ बाबू उर्फ संजू (19) के रूप में हुई है.

नाई का काम करता है मुख्य आरोपी

अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) के अनुसार, गिरोह का मुख्य आरोपी साकिब मेरठ में नाई का काम करता है. उसका संपर्क सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तानी हैंडलर्स से हुआ था. प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि एक अन्य व्यक्ति आकिब, जो वर्तमान में दुबई में होने की आशंका है, ने उसका परिचय कराया था. आकिब के सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनकी जांच की जा रही है.

लखनऊ में विस्फोट की योजना

उन्होंने बताया कि साकिब ने दो अप्रैल को लखनऊ में विस्फोट की योजना बनाई थी, लेकिन उससे पहले ही एटीएस ने गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया. आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम, सिग्नल और इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स तथा कट्टरपंथी समूहों से संपर्क में थे.

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह रेलवे सिग्नल बॉक्स को नुकसान पहुंचाने, गैस सिलेंडर से भरे ट्रकों में आग लगाने और राजनीतिक हस्तियों की रेकी करने जैसी गतिविधियों में शामिल था. आरोपियों ने कुछ स्थानों पर आगजनी की घटनाओं को अंजाम देकर उनके वीडियो भेजे और क्यूआर कोड के माध्यम से पैसे प्राप्त किए.

कई शहरों में निगरानी

पुलिस के अनुसार, गिरोह ने लखनऊ, गाजियाबाद और अलीगढ़ समेत कई शहरों में निगरानी की थी. एडीजी ने उम्मीद जताई कि पांच दिन की रिमांड के दौरान एटीएस को मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलेंगे. एटीएस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े हैंडलर्स के संपर्क में था और भारत में सामूहिक नरसंहार तथा सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाने की बड़ी साजिश रच रहा था.

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)

RSS
Follow by Email
Pinterest
LinkedIn
Share
Telegram
WhatsApp
Reddit