रिजीम चेंज करना नहीं था मकसद… मार्को रुबियो ने कांग्रेस को बताया ईरान पर हमला करने का कारण

ईरान के खिलाफ जारी ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्यों को क्लोज्ड-डोर ब्रीफिंग दी. इस ब्रीफिंग में डिफेंस सेक्रेटरी पेट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ भी मौजूद थे. रुबियो ने इस ब्रीफिंग में ईरान पर हमले के कारणों, मकसद और आगे की रणनीति की जानकारी सांसदों को दी, साथ ही यह भी साफ किया कि सबसे खतरनाक हमले अभी बाकी हैं.

ईरान पर स्ट्राइक को कई सीनेट मेंबर वॉर ऑफ च्वाइस बता रहे हैं. जबकि ट्रंप ने इन हमलों के पीछे ईरान द्वारा अमेरिका पर हमले की साजिश बताया है. रुबियो ने सांसदों को बताया कि अमेरिका को इजराइल के प्लान्ड ऑपरेशन की जानकारी थी, जिसके बाद ईरान अमेरिकी बलों पर हमला करने वाला था. उन्होंने इसे ‘इमिनेंट थ्रेट’ बताते हुए कहा कि अमेरिकी हताहतों को कम करने के लिए ये हमले जरूरी थे.

हालांकि डेमोक्रेटिक सांसद सेन. मार्क वॉर्नर और चक शूमर ने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए इसे ‘वॉर ऑफ च्वाइस’ करार दिया और ब्रीफिंग को फालतू बताया. उन्होंने वॉर पावर्स रेजोल्यूशन पर वोट की मांग की है, हालांकि इसके पारित होने की संभावना कम है.

रुबियो ने ऑपरेशन के तीन मुख्य उद्देश्य बताए

रुबियो ने ब्रीफिंग में ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान के तीन प्रमुख लक्ष्य बताए. ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता, खासकर शॉर्ट-रेंज मिसाइलों को पूरी तरह नष्ट करना और उन्हें दोबारा बनाने से रोकना. दूसरा ईरान की नौसेना को खत्म करना ताकि वैश्विक शिपिंग और अमेरिकी सहयोगी देशों की संपत्तियों पर खतरा खत्म हो सके. इसके अलावा ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोकना ताकि भविष्य में कोई भी शासन अमेरिका या उसके सहयोगियों को धमकी न दे सके.

रिजीम चेंज नहीं था ऑपरेशन का मकसद- रूबियो

रुबियो ने साफ किया कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य शासन परिवर्तन नहीं है. उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सरकार बदलना नहीं है, लेकिन अगर ईरान के लोग खुद शासन बदलना चाहते हैं. तो अमेरिका उसमें अपनी भूमिका निभा सकता है.” ध्यान देने वाली बात है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही ईरानी लोगों से सरकार बदलने की अपील की है.

सबसे बड़ा हमला अभी बाकी है- रुबियो

रुबियो ने चेतावनी दी कि यह ऑपरेशन शेड्यूल से आगे चल रहा है, लेकिन सबसे कठिन हमले अभी बाकी हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान पर और भी सख्त हमले करने वाली है. फिलहाल ग्राउंड ट्रूप्स उतारने की कोई योजना नहीं है और मुख्य लक्ष्य हवाई और मिसाइल हमलों से ही हासिल किए जाएंगे.

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति किसी भी विकल्प को खारिज नहीं करेंगे. इस ऑपरेशन में अब तक 6 अमेरिकी सर्विस मेंबर्स की मौत की पुष्टि हुई है. इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर यह हमला न किया जाता तो अगले डेढ़ साल में ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता इतनी मजबूत हो जाती कि कहीं अधिक नुकसान हो सकता था.

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