रोज ₹4,076 करोड़ का इजाफा! जानिए देश के सबसे अमीर बिजनेस घरानों की ताकत और कमाई का गणित

‘2026 बार्कलेज प्राइवेट क्लाइंट्स हुरुन इंडिया मोस्ट वैल्यूएबल फैमिली बिजनेस लिस्ट’ के अनुसार, भारत के 300 सबसे मूल्यवान पारिवारिक कारोबारियों की कुल कीमत अब 138 लाख करोड़ रुपए (1.46 ट्रिलियन डॉलर) है. उनकी संयुक्त कीमत दुनिया की 18वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी के बराबर है, जो नीदरलैंड, सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और पोलैंड जैसे देशों से भी आगे है. इससे भी ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि इन व्यवसायों ने 2024 के एडिशन के बाद से अपनी कीमत में लगभग 30 लाख करोड़ रुपए जोड़े हैं, जो पिछले दो वर्षों में हर दिन लगभग 4,076 करोड़ रुपए के बराबर है. 2024 के बाद से उनकी संयुक्त कीमत में 27.5 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 में 1.1 फीसदी और सेंसेक्स में 3.7 फीसदी की गिरावट आई है.

अंबानी देश का सबसे अमीर परिवार

अंबानी परिवार टॉप पर बना हुआ है. रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की वजह से इस परिवार की वैल्यूएशन 25.82 लाख करोड़ रुपए है. हालांकि, पिछले साल इसकी वैल्यू में 8.5 फीसदी की गिरावट आई. इस गिरावट के बावजूद, अंबानी परिवार लिस्ट में बाकी सभी से काफी आगे है. दूसरे नंबर पर मौजूद कुमार मंगलम बिड़ला परिवार की वैल्यू 8.14 लाख करोड़ रुपए है — जो अंबानी परिवार की वैल्यू का एक-तिहाई से भी कम है. कुमार मंगलम बिड़ला परिवार दूसरे स्थान पर आ गया है. इसकी वैल्यू 26 फीसदी बढ़कर ₹8.14 लाख करोड़ हो गई है. जिंदल परिवार तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. इसकी वैल्यू 40 फीसदी बढ़कर 8.02 लाख करोड़ रुपए हो गई है.

बजाज परिवार 7.7 लाख करोड़ रुपए के साथ चौथे स्थान पर बना हुआ है, हालांकि इसकी वैल्यू में 3.9 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि महिंद्रा परिवार 5.15 लाख करोड़ रुपए के साथ पांचवें स्थान पर है, जिसमें 5.4 फीसदी की गिरावट आई है. अनिल अग्रवाल परिवार लिस्ट में सबसे ज़्यादा बढ़त हासिल करने वालों में शामिल है. वेदांता के पांच अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बंटवारे के बाद इसकी वैल्यू 75 फीसदी बढ़कर 4.45 लाख करोड़ रुपए हो गई है. तीन सालों में परिवार की संपत्ति में 212 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

रिपोर्ट के अनुसार, टॉप तीन परिवारों — अंबानी, बिड़ला और जिंदल — की कुल वैल्यू लगभग 42 लाख करोड़ रुपए है, जो भारत के कुल लिस्टेड मार्केट कैपिटलाइज़ेशन का लगभग 9 फीसदी है. रैंकिंग में नीचे की तरफ भी संपत्ति का केंद्रीकरण दिखाई देता है. टॉप 10 परिवारों की वैल्यू, 300 परिवारों की लिस्ट की कुल वैल्यू का 51 फीसदी है.

पहली जेनरेशन की दौलत में कितना इजाफा

इस साल की रिपोर्ट में एक अहम बात यह है कि इसमें पहली पीढ़ी के 100 पारिवारिक व्यवसायों की अलग से रैंकिंग की गई है. इन व्यवसायों की कुल वैल्यू 77.8 लाख करोड़ रुपए है. जब दोनों लिस्ट को मिलाया जाता है, तो 400 परिवारों की कुल वैल्यू 215.8 लाख करोड़ रुपए होती है. पहली पीढ़ी वाली कैटेगरी में अडानी परिवार सबसे आगे है, जिसकी वैल्यू 19.6 लाख करोड़ रुपए है.

सुनील भारती मित्तल का परिवार, भारती एयरटेल के जरिए, 12.1 लाख करोड़ रुपए के साथ दूसरे नंबर पर है, और उसके बाद सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज के दिलीप सांघवी का परिवार 4.55 लाख करोड़ रुपए के साथ है. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया का पूनावाला परिवार 2.98 लाख करोड़ रुपए के साथ चौथे नंबर पर है, जबकि एवेन्यू सुपरमार्ट्स का दमानी परिवार 2.86 लाख करोड़ रुपए के साथ पांचवें नंबर पर है.

हुरुन इंडिया के फाउंडर और चीफ रिसर्चर अनस रहमान जुनैद ने कहा कि यह भी उतनी ही अहम बात है कि नई दौलत कहां बन रही है. पहली पीढ़ी के उद्यमी अब मजबूती से सबसे आगे हैं. उन्होंने बताया कि कम से कम 1 बिलियन डॉलर की संपत्ति वाले परिवारों की संख्या एक साल में 48 फीसदी बढ़कर 230 हो गई है.

230 परिवारों की कुल संपत्ति 1 बिलियन डॉलर

अरबपति पारिवारिक व्यवसायों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, अब 230 परिवारों की कुल संपत्ति 1 बिलियन डॉलर या उससे ज़्यादा है, जो पिछले साल की तुलना में 48 फीसदी ज्यादा है. बार्कलेज प्राइवेट बैंक के इंडिया हेड अद्रिश घोष ने कहा कि उत्तराधिकार, गवर्नेंस, फैमिली-ऑफिस स्ट्रक्चर, लिक्विडिटी मैनेजमेंट और ग्लोबल डाइवर्सिफिकेशन जैसे मुद्दे बिजनेस चलाने वाले परिवारों के लिए तेजी से महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं बनते जा रहे हैं. रिपोर्ट में पाया गया कि टॉप 300 परिवारों में से 79 परिवार फैमिली ऑफिस चलाते हैं, जबकि पहली पीढ़ी के 36 फीसदी परिवारों ने पहले ही ऐसे स्ट्रक्चर बना लिए हैं. इससे पता चलता है कि फैमिली ऑफिस अब भारत के कुछ पुराने औद्योगिक घरानों तक ही सीमित नहीं रह गया है. यह नए उद्यमियों के लिए भी वेल्थ-मैनेजमेंट सिस्टम का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है.

मुंबई पारिवारिक कारोबारी घरानों का सेंटर

मुंबई इस लिस्ट में शामिल कंपनियों के लिए सबसे बड़ा हेडक्वार्टर बना हुआ है. इस शहर में 95 कंपनियां हैं, जो पिछले साल की तुलना में चार ज़्यादा हैं. इसके बाद NCR में 58 और कोलकाता में 26 कंपनियां हैं. कुल मिलाकर, इस लिस्ट में 45 शहर शामिल हैं. लेकिन नई संपत्ति का भौगोलिक दायरा बदलने लगा है. हैदराबाद में पहली पीढ़ी की 15 कंपनियां हैं, जबकि स्थापित पारिवारिक व्यवसाय नौ हैं. वहीं मुंबई में पहली पीढ़ी की 24 कंपनियां हैं और NCR में 18 हैं. रिपोर्ट में छत्रपति संभाजीनगर और त्रिशूर का भी जिक्र है, जहां पहली पीढ़ी के व्यवसायों ने स्थापित पारिवारिक उद्यमों को पीछे छोड़ दिया है.

कौन से उद्योग सबसे ज्यादा पारिवारिक संपत्ति बना रहे हैं?

पूरी लिस्ट में सबसे ज़्यादा कंपनियाँ ‘इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स’ सेक्टर की हैं (47 कंपनियां), इसके बाद ‘ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स’ और ‘केमिकल्स’ सेक्टर हैं, जिनमें से हर एक में 31 कंपनियां हैं. लेकिन फैमिली-बिजनेस की सबसे ज़्यादा औसत वैल्यू ‘मेटल्स और माइनिंग’ सेक्टर से आती है, जो 84,019 करोड़ रुपए है. इसकी तुलना में, लिस्ट में शामिल ‘फ़ूड और बेवरेजेज़’ बिज़नेस की औसत वैल्यू 12,714 करोड़ रुपए है.

पहली पीढ़ी के बिजनेस में ‘फार्मास्यूटिकल्स’ सेक्टर खास तौर पर अहम है, जिसमें 22 कंपनियां हैं और औसत वैल्यू 74,218 करोड़ रुपए है. ‘इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स’ में पहली पीढ़ी के 10 बिजनेस हैं, जबकि ‘ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स’ और ‘रियल एस्टेट’ में 9-9 बिजनेस हैं.

डेटा से पता चलता है कि भारत में नई दौलत सिर्फ टेक्नोलॉजी या कंज्यूमर बिजनेस तक ही सीमित नहीं है. फार्मास्यूटिकल्स, मैन्युफैक्चरिंग, मेटल्स, इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स और रियल एस्टेट जैसे पारंपरिक सेक्टर भी बड़ी दौलत बना रहे हैं.

इन परिवारों ने चौंकाया

हालांकि एब्सोल्यूट-वैल्यू रैंकिंग में अंबानी परिवार का दबदबा है, लेकिन कुछ छोटे बिजनेस ने बहुत तेजी से ग्रोथ की है. ‘शाही एक्सपोर्ट्स’ के आहूजा परिवार ने लिस्ट में तीन साल में वैल्यू में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी दर्ज की, जो 352 फीसदी बढ़कर 37,500 करोड़ रुपए हो गई. ‘गरवारे हाई-टेक फिल्म्स’ से जुड़े शशिकांत भालचंद्र गरवारे परिवार ने तीन साल में 61 पायदान की छलांग लगाई, और उनकी वैल्यू 300 फीसदी बढ़कर 15,600 करोड़ रुपए हो गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी वजह कंपनी का हाई-मार्जिन वाली स्पेशलिटी फिल्म्स की ओर बढ़ना और FY2023 के बाद से मुनाफ़े में 100 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ है. पच्चीस परिवारों ने पिछले तीन सालों में अपनी वैल्यू दोगुनी से ज़्यादा कर ली है. एब्सोल्यूट टर्म्स में, जिंदल परिवार ने सबसे ज़्यादा वैल्यू बनाई, तीन साल में 3.3 लाख करोड़ रुपए जोड़े और कुल वैल्यू 8.02 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई. अनिल अग्रवाल परिवार ने 3.03 लाख करोड़ रुपए जोड़े, जबकि कुमार मंगलम बिड़ला परिवार ने 2.75 लाख करोड़ रुपए जोड़े.

इन परिवारों की दौलत में गिरावट

दौलत बनाने की कहानी हर जगह एक जैसी पॉजिटिव नहीं है. ‘HCL टेक्नोलॉजीज’ से जुड़े नाडर परिवार ने तीन साल में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की, जिसमें उनकी वैल्यू 32 फीसदी या 1.39 लाख करोड़ रुपए कम हो गई. राजीव सिंह परिवार की संपत्ति में 25 फीसदी की गिरावट आई, जो गिरावट के मामले में दूसरे स्थान पर रहा. सबसे ज़्यादा गिरावट वाले क्षेत्रों में सॉफ्टवेयर और सर्विसेज तथा रियल एस्टेट प्रमुख रूप से शामिल रहे. ताजा रैंकिंग में नाडर परिवार की संपत्ति 2.91 लाख करोड़ रुपए आंकी गई, जिसमें साल-दर-साल 38 फीसदी की कमी आई, जबकि प्रेमजी परिवार की संपत्ति 2.72 लाख करोड़ रुपए रही, जिसमें 2.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

फैमिली बिजनेस कितना देते हैं रोजगार?

ये 300 परिवार मिलकर 54 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं, लगभग 56 लाख करोड़ रुपए का रेवेन्यू कमाते हैं और 5.6 लाख करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट दिखाते हैं, जिससे उनका कुल नेट मार्जिन लगभग 10 फीसदी हो जाता है. रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने टैक्स के तौर पर लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपए का योगदान दिया, जो भारत के कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन का लगभग 17 फीसदी है. ये आंकड़े बताते हैं कि भारत के बड़े आर्थिक ढांचे में परिवार के मालिकाना हक वाले बिजनेस क्यों अहम हैं. उनकी संपत्ति सिर्फ पर्सनल पोर्टफोलियो में नहीं पड़ी है. इसका ज़्यादातर हिस्सा उन ऑपरेटिंग कंपनियों में लगा है जो लाखों लोगों को रोजगार देती हैं और काफी टैक्स रेवेन्यू पैदा करती हैं.

धीरे-धीरे बड़ी हो रही महिलाओं की भूमिका

लीडरशिप में महिलाओं की भागीदारी अभी भी कम है, लेकिन उनकी मौजूदगी बढ़ रही है. इस लिस्ट में 18 ऐसी कंपनियां शामिल हैं, जिनकी कमान महिलाओं के हाथ में है. हिंदुस्तान जिंक की प्रिया अग्रवाल हेब्बार सबसे ज्यादा वैल्यू वाली महिला-नेतृत्व वाली कंपनी (वैल्यू 4.45 लाख करोड़ रुपए) को चलाती हैं, और उनके बाद HCL टेक्नोलॉजीज की रोशनी नाडर मल्होत्रा ​​(वैल्यू ₹2.91 लाख करोड़) का नंबर आता है. FSN ई-कॉमर्स वेंचर्स की फाल्गुनी नायर इस लिस्ट में पहली पीढ़ी के बिजनेस को चलाने वाली एकमात्र महिला हैं. रिपोर्ट में CRI पंप्स का भी जिक्र है, जिसके बिज़नेस में शामिल परिवार के सदस्यों में सात महिलाएं हैं.

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