कन्नप्पा के शिवजी के पूजन के लिए कोई खास सामग्री उपलब्ध नहीं थी. उसका पूरा जीवन शिकार पर ही निर्भर था और वही उसकी सबसे प्रिय चीज थी. इसलिए अपने शिकार का सबसे अच्छा हिस्सा वह उस शिवलिंग को अर्पित कर देता था. उसके पास पानी रखने के लिए कोई पात्र नहीं था. इसलिए वो अपने मुंह में पानी भरकर लाता था और उसी से शिवलिंग का अभिषेक करता था.