शुगर की जांच के लिए नई तकनीक का कमाल, अब मिलेगी रियल टाइम डायबिटीज ट्रैकिंग की सुविधा

शुगर की जांच के लिए नई तकनीक का कमाल, अब मिलेगी रियल टाइम डायबिटीज ट्रैकिंग की सुविधा

डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों के लिए एक नई तकनीक बड़ी राहत बनकर सामने आई है. यह नया सेंसर अब लगातार 15 दिनों तक ब्लड शुगर लेवल मॉनिटर करता है और हर एक मिनट में मोबाइल पर रियल-टाइम अपडेट देता है. खास बात यह है कि इसके लिए उंगली में बार-बार सुई चुभाने की जरूरत नहीं पड़ती. चिकित्सकों का कहना है कि यह तकनीक डायबिटीज मरीज़ के इलाज को एक नई दिशा दे सकती है.

नई CGM तकनीक पहले की तुलना में और भी अधिक समय तक काम करती है. इसके सेंसर अब 15 दिनों तक लगातार ग्लूकोज लेवल ट्रैक करता है. इसे ऊपरी बांह के पीछे लगाया जाता है और यह बेहद हल्का व आरामदायक है. इस डिवाइस की सबसे बड़ी विशेषता है, रियल-टाइम डेटा. अब मरीजों को सेंसर स्कैन करने की जरूरत नहीं होती.

कैसे काम करता है डिवाइस?

यह सेंसर ब्लूटूथ के जरिए हर एक मिनट में शुगर लेवल सीधे मरीज के मोबाइल पर भेजता है. वहीं इसका ऐप पिछले 8 घंटों का पूरा ट्रेंड भी दिखाता है, जिससे मरीज और डॉक्टर दोनों स्थिति को बेहतर समझ पाते हैं. इस तकनीक की सटीकता काफी बेहतर है. शुगर चेक के लिए बार-बार फिंगर प्रिक की जरूरत खत्म हो जाती है.

डायबिटीज नियंत्रण में काफी मदद

लगातार मिलने वाली रीडिंग मरीजों को डायबिटीज नियंत्रण में काफी मदद करती है. इसका रीयल टाइम डाटा डॉक्टर्स को भी मिलता रहता है, जिसके जरिए किसी भी गंभीर स्थिति में डॉक्टर को तत्काल पता लग जाता है और वो मरीज को अपने स्तर पर ही उपचार उपलब्ध करवा सकते हैं.

हाई और लो शुगर के लिए कस्टम अलर्ट की सुविधा

सेंसर में हाई और लो शुगर के लिए कस्टम अलर्ट की सुविधा भी दी गई है. यदि ग्लूकोज लेवल अचानक गिरता या बढ़ता है, तो मोबाइल तुरंत चेतावनी देता है. यह सुविधा खासकर इंसुलिन लेने वाले मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है. यह तकनीक टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज दोनों तरह के मरीजों के लिए उपयोगी है.

डायबिटीज के मरीजों काौ इलाज

रियल-टाइम अलर्ट्स से कई बार हाइपो या हाइपरग्लाइसीमिया की गंभीर स्थिति बनने से पहले ही रोकथाम संभव हो जाती है. यह 2 वर्ष से ऊपर के बच्चों के लिए भी सुरक्षित है. चिकित्सकों के अनुसार, यह नई मॉनिटरिंग प्रणाली मरीजों के डेटा को परिवार और डॉक्टर के साथ साझा करने की सुविधा भी देती है, जिससे इलाज और भी सटीक तरीके से किया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में डायबिटीज के मरीजों के इलाज को पूरी तरह से बदल सकती है.

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