शेयर बाजार डगमगाया पर IPO मार्केट में बरसे पैसे! जुलाई में टूटा 20 महीने का रिकॉर्ड

शेयर बाजार डगमगाया पर IPO मार्केट में बरसे पैसे! जुलाई में टूटा 20 महीने का रिकॉर्ड

जियो पॉ​लिटिकल टेंशन और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बावजूद, जुलाई में मेनबोर्ड और एसएमई आईपीओ और क्यूआईपी के जरिए फंड जुटाने का काम 20 महीने के हाई पर पहुंच गया. प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने लगभग 36 कंपनियों ने मेनबोर्ड IPOs, SME IPOs और QIPs के जरिए करीब 52,300 करोड़ रुपए जुटाए. यह नवंबर 2024 के बाद से फंड जुटाने का सबसे मजबूत महीना रहा, जब 24 कंपनियों ने इन तरीकों से करीब 56,737 करोड़ रुपए जुटाए थे. 2026 में अब तक, 167 कंपनियों ने मेनबोर्ड IPOs, SME IPOs और QIPs के ज़रिए करीब 1.06 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं. इसकी तुलना में, 2025 में कुल 406 कंपनियों ने 2.6 लाख करोड़ रुपए जुटाए थे.

अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े जियो पॉलिटिकल टेंशन के कारण इस महीने घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा. कच्चे तेल की कीमत कुछ समय के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई, जिससे भारत की मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गईं. जून के मध्य में कुछ समय के लिए खरीदारी शुरू करने के बाद विदेशी निवेशक फिर से बिकवाली करने लगे. उतार-चढ़ाव के बावजूद, इस महीने सेंसेक्स और निफ्टी में 0.5 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि BSE मिडकैप इंडेक्स 1.2 प्रतिशत चढ़ा. हालांकि, BSE स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई.

बड़े आईपीओ ने कितने जुटाए

SAMCO सिक्योरिटीज में मार्केट पर्सपेक्टिव्स और रिसर्च के प्रमुख अपूर्व सेठ ने मनी कंट्रोल की रिपोर्ट में कहा कि IPOs और QIPs में आई तेजी एक ऐसे मौके को दिखाती है जहां जारीकर्ता और निवेशक एक आम सहमति पर पहुंच रहे हैं. महीनों के उतार-चढ़ाव वाले बाजार के बाद सेंटीमेंट में सुधार हुआ है, जबकि सेकेंडरी मार्केट कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहा है. म्यूचुअल फंड SIPs और इंस्टीट्यूशनल फ्लो के कारण घरेलू लिक्विडिटी मजबूत बनी हुई है, और कंपनियों के लिए आकर्षक कीमतों पर पूंजी जुटाने के लिए वैल्यूएशन में भी काफी सुधार हुआ है.

सेठ ने कहा कि प्रमोटर अच्छे वैल्यूएशन का फायदा उठाना चाहते हैं, जबकि लिस्टेड कंपनियां विस्तार के लिए फंड जुटाने, बैलेंस शीट से कर्ज कम करने और अधिग्रहण करने के लिए QIPs का इस्तेमाल कर रही हैं. इस बीच, निवेशक जोखिम लेने की अच्छी क्षमता दिखा रहे हैं, खासकर उन कंपनियों के लिए जिनकी कमाई की संभावना साफ है और जिनकी कीमत उचित है. मेनबोर्ड IPO मार्केट के लिए जुलाई का महीना नवंबर 2024 के बाद सबसे अच्छा रहा, जिसमें 12 कंपनियों ने लगभग 28,650 करोड़ रुपये जुटाए.

बड़े IPO में SBI फंड्स मैनेजमेंट शामिल था, जिसने 9,796 करोड़ रुपये जुटाए. इसके बाद मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज (9,276 करोड़ रुपए), इंडो-MIM (3,810 करोड़ रुपए), जुनिपर ग्रीन एनर्जी (1,800 करोड़ रुपए) और लोहिया कॉर्प लिमिटेड (1,102 करोड़ रुपए) का नंबर रहा. इस महीने आए अन्य IPO में लेजर पावर एंड इंफ्रा, कुसुमगर, कैलिबर माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स और नैैक पैकेजिंग शामिल थे.

क्यूआईपी के जरिए जुटाए 19300 करोड़

QIP जारी करने के मामले में भी जुलाई का महीना जुलाई 2025 के बाद सबसे अच्छा रहा, जिसमें छह कंपनियों ने लगभग 19,300 करोड़ रुपए जुटाए. इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी अडानी एंटरप्राइजेज की रही, जिसने लगभग 15,000 करोड़ रुपए जुटाए. इसके बाद अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस (3,500 करोड़ रुपए), बेलराइज इंडस्ट्रीज (1,700 करोड़ रुपए), एथर एनर्जी (1,300 करोड़ रुपए), ब्लू जेट हेल्थकेयर (800 करोड़ रुपए) और आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी (500 करोड़ रुपए) जैसी कंपनियों का स्थान रहा. SME सेगमेंट में, जुलाई के दौरान 17 कंपनियों ने कुल मिलाकर 892 करोड़ रुपए जुटाए, जबकि जून में 24 कंपनियों ने 941 करोड़ रुपए जुटाए थे.

जानकारों का कहना है कि साल के बाकी समय में भी फंड जुटाने की प्रक्रिया अच्छी बनी रहने की उम्मीद है, हालांकि हर महीने जुलाई जैसी रिकॉर्ड रफ्तार की उम्मीद कम है. यह रफ्तार घरेलू इक्विटी मार्केट में स्थिरता, ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक हालात (जैसे ब्याज दरें, जियो-पॉलिटिकल घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों का निवेश) और हालिया IPO के लिस्टिंग के बाद के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी.

अगर नए लिस्ट हुए शेयरों से ठीक-ठाक रिटर्न मिलता रहा, तो फंड जुटाने की पाइपलाइन मजबूत बनी रहने की संभावना है. हालांकि, अगर लिस्टिंग से निराशा होती है या वैल्यूएशन बहुत ज़्यादा आक्रामक हो जाते हैं, तो निवेशकों के और ज़्यादा सोच-समझकर निवेश करने की उम्मीद है और कमजोर कंपनियां फंड जुटाने की अपनी योजनाओं को टाल सकती हैं.

सेंटीमेंट में हुआ सुधार

कंप्लीट सर्कल कैपिटल के पार्टनर और VP, आदित्य कोंडावार ने मनी कंट्रोल की रिपोर्ट में कहा कि SBI AMC IPO के सफल लॉन्च और निवेशकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया ने मार्केट के सेंटीमेंट को काफी बेहतर बनाया है, जिससे संकेत मिलता है कि प्राइमरी मार्केट में रिस्क लेने की क्षमता (रिस्क एपेटाइट) वापस आ रही है. अगर जियोपॉलिटिकल माहौल स्थिर रहता है, तो आने वाली तिमाहियों में मार्केट में बड़े IPO और QIP की अच्छी-खासी संख्या देखने को मिल सकती है. हालांकि, कोंडावार ने कहा कि इस मोमेंटम को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि अगले कुछ IPO भी SBI AMC की तरह लिस्टिंग पर अच्छा फायदा दें और उन्हें ज़बरदस्त सब्सक्रिप्शन मिले, ताकि जारी करने वाली कंपनियों और निवेशकों, दोनों का भरोसा बना रहे.

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