Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी के अपने आदेश में कहा, “किसी वकील (इस मामले में अपीलकर्ता) की पेशेवर कर्तव्य निर्वहन के रूप में सलाह या सुझाव देने की क्षमता मात्र उपस्थिति को धमकी नहीं माना जा सकता है और यह मूलभूत तथ्य इस मामले में स्पष्ट रूप से मौजूद नहीं है.” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज स्पष्ट बयान से यह पता चलता है कि आपराधिक धमकी का कोई इरादा प्रथमदृष्टया स्थापित नहीं हुआ है.