सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की इलाहाबाद HC से सिफारिश, लंबित मामलों के निपटारे के लिए 5 एड-हॉक जज की हो नियुक्ति

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने एक अहम कदम उठाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के भारी लंबित मामलों से निपटने के लिए पांच सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को दो साल की अवधि के लिए ‘एड-हॉक’ (अस्थायी) जज नियुक्त करने की सिफारिश की है. यह सिफारिश संविधान के अनुच्छेद 224 ए के तहत की गई है, जो हाईकोर्ट में अस्थायी न्यायाधीश नियुक्त करने का प्रावधान करता है.

यह कदम देश के सबसे बड़े हाईकोर्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों, खासकर आपराधिक मामलों में हो रही देरी को कम करने के लिए उठाया गया है. हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के 160 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इस समय सिर्फ 110 ही कार्यरत हैं, जिससे लाखों मामले लंबित हैं.

किन न्यायाधीशों को किया नियुक्त?

नियुक्त होने वाले न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खान, न्यायमूर्ति मोहम्मद असलम, न्यायमूर्ति सैयद आफताब हुसैन रिजवी, न्यायमूर्ति रेनू अग्रवाल और न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा शामिल हैं. इन अनुभवी जजों से अपेक्षा है कि वे पुराने मामलों का निपटारा तेजी से कर पाएंगे.

इस प्रावधान का इस्तेमाल पहले भी कुछ मौकों पर हुआ है. हाल के सालों में, सुप्रीम कोर्ट ने एडहॉक जजों की नियुक्ति से जुड़े नियमों को लचीला बनाया है ताकि अदालती बोझ को प्रबंधित करने में मदद मिल सके.

कोर्ट के इस कदम माना जा रहा सकारात्मक

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक सकारात्मक कदम है जिससे मुकदमेबाजों को राहत मिल सकती है, लेकिन यह एक अस्थायी समाधान है. न्यायिक संकट के दीर्घकालिक समाधान के लिए नियमित न्यायाधीशों के पदों को तेजी से भरना जरूरी है.

साथ ही उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए लंबे समय से इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच की मांग उठ रही है. जिसको लेकर पश्चिम उत्तर प्रदेश में लगातार प्रदर्शन होते रहते हैं. बेंच के मांग करने वाले लोग हाईकोर्ट की एक बैंच मुरादाबाद या मेरठ में चाहते हैं, जिससे पश्चिम यूपी के लोगों का समय और पैसा बच सके, साथ ही जल्द मुकदमों का निपटारा हो.

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