होर्मुज की नाकेबंदी में हम आपके साथ नहीं… ब्रिटेन ने खारिज किया राष्ट्रपति ट्रंप का दावा

होर्मुज की नाकेबंदी में हम आपके साथ नहीं… ब्रिटेन ने खारिज किया राष्ट्रपति ट्रंप का दावा

ईरान के साथ एक तरफ शांति वार्ता विफल हो गई है तो दूसरी तरफ अमेरिका अपने सहयोगी देशों को भी अपने साथ रखने में सफल नहीं हो पा रहा है. दरअसल होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी को लेकर ब्रिटेन की तरफ से जो जवाब आया है, वो ट्रंप के लिए चिंताजनक है. ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज की नाकेबंदी में मदद के लिए ब्रिटेन युद्धपोत भेजेगा. हालांकि ब्रिटेन ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया है. उसने कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी में ब्रिटेन हिस्सा नहीं लेगा.

इससे पहले ईरान और अमेरिका के युद्ध के दौरान भी ब्रिटेन ने जंग में शामिल होने को लेकर अपनी स्थिति को साफ कर दिया था. ब्रिटेन ने ट्रंप से साफ कहा था कि वह ईरान के खिलाफ युद्ध में उनका साथ नहीं देने वाला.

होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी का ऐलान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु हथियारों के मुद्दे पर तेहरान के साथ शांति वार्ता विफल होने के कुछ घंटों बाद रविवार को घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के प्रवेश या निकास को रोकने के लिए तत्काल नाकेबंदी शुरू करेगी.ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने अमेरिकी नौसेना को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उन सभी जहाजों की पहचान करने और उन्हें रोकने का निर्देश दिया है जिन्होंने ईरान को टोल का भुगतान किया है.

टोल का भुगतान करना अवैध

उन्होंने कहा कि जो कोई भी अवैध टोल का भुगतान करेगा, उसे समुद्र में सुरक्षित आवागमन की अनुमति नहीं मिलेगी. उन्होंने दावा किया कि अन्य देश भी होर्मुज स्ट्रेट की इस नाकेबंदी में शामिल होंगे. होर्मुज एक बेहद महत्वपूर्ण और संकरा समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया की कुल तेल आपूर्ति के लगभग पांचवें हिस्से का परिवहन होता है.

ट्रंप ने कहा कि उन्हें पैसा चाहिए और उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें परमाणु चाहिए. इसके अतिरिक्त हम पूरी तरह से तैयार और मुस्तैद हैं और हमारी सेना उचित समय पर ईरान के बचे-खुचे हिस्से को भी पूरी तरह से नष्ट कर देगी. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने इस्लामाबाद में ईरान के नेताओं के साथ हुई बातचीत के बारे में जानकारी दी.

परमाणु पर सहमति नहीं बनी

ट्रंप ने कहा, तो, बात यह है कि बैठक अच्छी रही, ज्यादातर बिंदुओं पर सहमति बन गई, लेकिन एकमात्र मुद्दा जो वास्तव में मायने रखता था, यानी परमाणु, उस पर सहमति नहीं बन पाई.उन्होंने इस्लामाबाद में बातचीत की मेजबानी में पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना की. ट्रंप ने कहा कि वे दोनों बहुत जबरदस्त व्यक्ति हैं और लगातार मुझे इस बात के लिए धन्यवाद देते हैं कि मैंने ऐसे संघर्ष में तीन से पांच करोड़ लोगों की जान बचाई, जो भारत के साथ एक विनाशकारी युद्ध हो सकता था. मुझे यह सुनकर हमेशा अच्छा लगता है.

उन्होंने कहा कि ईरानी नेतृत्व के साथ जिन बिंदुओं पर सहमति बनती, वे सैन्य अभियानों को उनके अंजाम तक ले जाने से बेहतर थे.ट्रंप ने कहा कि लेकिन परमाणु ऊर्जा को ऐसे अस्थिर, और अप्रत्याशित लोगों के हाथों में सौंपने की तुलना में ये सभी बातें कोई मायने नहीं रखतीं. उन्होंने कहा कि अमेरिका के तीनों प्रतिनिधि, ईरान के प्रतिनिधियों – मोहम्मद बागेर गालिबफ, अब्बास अराघची और अली बाघेरी के प्रति काफी मित्रवत थे और उनके प्रति सम्मानजनक व्यवहार किया.

ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए

ट्रंप ने कहा, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वे सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर बेहद अड़ियल रुख अपनाए हुए थे और जैसा कि मैंने हमेशा कहा है, शुरू से ही, और कई साल पहले, ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए. अमेरिका और इजराइल के बीच 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से, ईरान में कम से कम 3,000, लेबनान में 2,020, इजराइल में 23 और खाड़ी अरब देशों में 12 से अधिक लोग मारे गए हैं और पश्चिम एशिया के लगभग छह देशों में बुनियादी ढांचे को स्थायी नुकसान पहुंचा है.

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की पकड़ ने फारस की खाड़ी और उसके तेल और गैस निर्यात को वैश्विक अर्थव्यवस्था की पहुंच से काफी हद तक दूर कर दिया है, जिससे ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं.

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