स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि राज्य के सभी CHC को प्रति वर्ष 10 लाख रुपए उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का समुचित रखरखाव हो सके. इसके बावजूद बिजली गुल होने पर मोबाइल टॉर्च की रोशनी में प्रसव कराने की कोशिश की गई, जिसमें मां और बच्चे की जान चली गई.