3 साल की मासूम से रेप के आरोपी की जमानत रद्द, AAP ने कहा- ‘मां के संघर्ष की जीत’

3 साल की मासूम से रेप के आरोपी की जमानत रद्द, AAP ने कहा- ‘मां के संघर्ष की जीत’

दिल्ली के जनकपुरी स्थित एक प्राइवेट स्कूल में 3 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को आरोपी की जमानत रद्द कर दी है. दिल्ली हाई कोर्ट ने स्कूल के 57 साल के आरोपी केयरटेकर की ज़मानत रद्द करते हुए आरोपी को 1 जुलाई को सरेंडर करने का आदेश दिया. जस्टिस विनोद कुमार की वेकेशन बेंच ने दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता की उन याचिकाओं पर फैसला सुनाया, जिनमें ट्रायल कोर्ट के 7 मई के फैसले के खिलाफ़ आरोपी को प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट के तहत मामले में जमानत पर रिहा करने का विरोध किया गया था.

जस्टिस कुमार ने कहा कि मैं राज्य और याचिकाकर्ता (शिकायतकर्ता) से सहमत हूं. दोनों याचिकाएं मंज़ूर की जाती हैं. आरोपी ललित कुमार को 1 जुलाई को दोपहर 2 बजे अधिकार क्षेत्र वाली POCSO कोर्ट के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया जाता है.

20 साल जेल की सजा

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पहले तर्क दिया था कि यह ऐसा मामला नहीं था, जिसमें ट्रायल कोर्ट को मुख्य आरोपी, यानी केयरटेकर को राहत देनी चाहिए थी. उन्होंने कहा था कि यह POCSO एक्ट के सेक्शन 6 के तहत गंभीर पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट का साफ मामला था, जिसमें कम से कम 20 साल जेल की सजा हो सकती है, क्योंकि बच्चे ने पहले ही अपराधी को पहचान लिया था और खास आरोप लगाए थे.

हालांकि आरोपी के वकील ने उसके खिलाफ सेक्सुअल असॉल्ट के सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि मौजूदा मामले के ‘बुनियादी तथ्य’ टिक नहीं सकते.

सरकार को घेर रही AAP ने क्या कहा?

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन आम आदमी पार्टी ने मुद्दे को उठाया, बच्ची की मां ने अपनी पूरी ताकत से संघर्ष किया और संघर्ष सफल रहा.

उन्होंने कहा कि पॉक्सो कोर्ट ने 5 दिन के अंदर आरोपी को जमानत दे दी थी, लेकिन पीड़िता की मां की याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसले को पलट दिया. पुलिस भी आरोपी की मदद कर रही थी. जब पहली बार पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था, तब पुलिस ने उसकी कस्टडी भी नहीं मांगी थी.

पॉक्सो मामले में आरोपी की जमानत खारिज

सौरभ भारद्वाज ने X पर कहा कि 3 साल की बच्ची से जुड़े पॉक्सो मामले में आरोपी की जमानत खारिज कर दी गई है. दिल्ली हाईकोर्ट में 3 साल की पीड़ित बच्ची की मां ने जमानत को चुनौती दी थी. यह जमानत स्कूल के 57 वर्षीय केयरटेकर और सीनियर क्लर्क को मिली थी. वकील ऋषिकेश कुमार ने जस्टिस विनोद कुमार के सामने इस मामले की पैरवी की.

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह बात बिल्कुल समझ से परे थी कि आरोपी को गिरफ्तारी के 5 दिन के भीतर ही जमानत दे दी गई थी. उस समय के पुलिस SHO और DCP ने आरोपी की मदद करने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी. यह और भी अजीब था कि जब पुलिस ने पहली बार इस आरोपी को गिरफ्तार किया था तो पुलिस ने उसकी हिरासत की मांग नहीं की थी. बाद में उस समय के SHO और DCP का जनकपुरी थाने और जिले से तबादला कर दिया गया था. यह बेहद शर्मनाक था कि इस मामले में कुछ लोगों ने आरोपी के समर्थन में खुलेआम प्रदर्शन किया था.

क्या है पूरा मामला?

आपको बता दें कि यह घटना 1 मई को तब सामने आई जब पीड़ित बच्ची की मां ने जनकपुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि आरोपी ने स्कूल के समय में उसकी बेटी के साथ सेक्शुअल असॉल्ट किया. शिकायत के मुताबिक, बच्ची एडमिशन के दूसरे दिन 30 अप्रैल को स्कूल गई थी. घर लौटने के बाद, उसने दर्द की शिकायत की. जब उसकी मां ने पूछा, तो लड़की ने बताया कि उसे स्कूल में एक सुनसान जगह पर ले जाया गया, जहां आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ असॉल्ट किया.

बच्चे की मां की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 64(1) (रेप की सज़ा) और POCSO एक्ट के सेक्शन 6 (गंभीर पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट की सज़ा) के तहत केस दर्ज किया.

दिल्ली पुलिस ने कहा कि बच्ची ने आरोपी की पहचान की, जिसके बाद आरोपी स्कूल केयरटेकर को 1 मई को गिरफ्तार कर लिया गया. बाद में उसे कोर्ट में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. हालांकि, दिल्ली पुलिस के कड़े विरोध के बावजूद 7 मई को द्वारका कोर्ट ने आरोपी को ज़मानत दे दी. दिल्ली पुलिस ने मामले में एक टीचर को भी अधिकारियों से घटना छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

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