नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन बेहद करीब, सुरक्षाबलों के रडार पर 300 नक्सली

नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन बेहद करीब, सुरक्षाबलों के रडार पर 300 नक्सली

नक्सलवाद को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मार्च 2026 की समयसीमा के बीच चलाए जा रहे सघन अभियान के दौरान चार शीर्ष कमांडर सहित लगभग 300 नक्सली सुरक्षाबलों के निशाने पर हैं. प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की शीर्ष चार केंद्रीय समिति (सीसी) के सदस्यों में मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, देवजी उर्फ कुंभा दादा उर्फ चेतन, राममन्ना उर्फ गणपति उर्फ लक्ष्मण राव और मल्लाह राजा रेड्डी उर्फ सागर शामिल हैं.

देवजी और उसके सहयोगी केसा सोढ़ी के इलाके में मौजूद होने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर एक सघन अभियान शुरू किया गया. अधिकारियों ने बताया कि रेड्डी को छोड़कर बाकी सभी शीर्ष कमांडर इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. रेड्डी के बारे में कहा जाता है कि वह ओडिशा में छिपा हुआ है.

चार शीर्ष कमांडर समेत 300 नक्सलियों की तलाश

सुरक्षाबलों को इन चार शीर्ष कमांडर समेत करीब 300 नक्सलियों की तलाश है. अधिकारियों ने कहा कि या तो वे आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा मार्च 2026 की समयसीमा तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए सघन अभियानों के दौरान सुरक्षाबल उन्हें खत्म कर देंगे.

नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटी

गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि नक्सलवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की संख्या घटकर छत्तीसगढ़ के तीन रह गई है, जिसमें बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर शामिल हैं. मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है. मंत्रालय ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खतरे को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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