हैदराबाद में होटल और रेस्तरां गैस की कमी, चूल्हे पर बन रहा खाना

हैदराबाद में होटल और रेस्तरां गैस की कमी, चूल्हे पर बन रहा खाना

मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है. इस जंग का असर सिर्फ इन देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी आंच अब दूसरे देशों तक भी पहुंचने लगी है, जिसमें भारत भी शामिल है. जंग के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट के सामने परेशानी खड़ा हो गई है.

भारत में पहले से पर्याप्त तैयारी न होने की वजह से देश के कई हिस्सों में रसोई गैस की कमी महसूस की जा रही है. स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई शहरों में होटल और रेस्टोरेंट गैस की कमी के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं. कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई में आई रुकावट ने होटल कारोबारियों की चिंता और बढ़ा दी है.

होटल-रेस्टोरेंट सबसे ज्यादा प्रभावित

हैदराबाद के होटल और रेस्टोरेंट भी इस गैस संकट से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. खास बात यह है कि इस समय रमजान का महीना चल रहा है, जिसके चलते होटल और रेस्टोरेंट बंद करना उनके लिए संभव नहीं है. रमजान के दौरान खाने-पीने की मांग बढ़ जाती है, इसलिए कारोबारियों को किसी भी तरह से अपना काम जारी रखना पड़ रहा है.

चूल्हे पर बन रहा खाना

गैस की भारी कमी के कारण कई रेस्टोरेंट अब पुराने तरीकों की ओर लौटने को मजबूर हो गए हैं. कई जगहों पर रसोई गैस की जगह लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल करके खाना बनाया जा रहा है. इससे काम तो चल रहा है, लेकिन इसमें ज्यादा मेहनत और समय लग रहा है. फिलहाल होटल मालिकों के पास यही एक विकल्प बचा है.

शाह गौस रेस्टोरेंट में भी गैस की कमी

हैदराबाद में बिरयानी के लिए मशहूर शाह गौस रेस्टोरेंट भी गैस की कमी से अछूता नहीं है. यहां भी अब बिरयानी लकड़ी के चूल्हे पर बनाई जा रही है. बिरयानी अब पारंपरिक तरीके से तैयार की जा रही है, ताकि ग्राहकों की मांग पूरी की जा सके.

पेट्रोलियम कंपनियों का आदेश

बताया जा रहा है कि पेट्रोलियम कंपनियों ने डीलरों को आदेश दिया है कि होटलों और रेस्टोरेंट्स को कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई फिलहाल रोक दी जाए. इस फैसले के बाद होटल मालिकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. खासकर रमजान के महीने में बड़े-बड़े होटल और रेस्टोरेंट लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हो गए हैं, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है.

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