
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते देश के घरेलू बाजार में एलपीजी की सीमित आपूर्ति को लेकर जनता की आशंकाओं से संबंधित विभिन्न रिपोर्टों के मद्देनजर, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बुधवार को एक अहम बैठक की. इस बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) के साथ-साथ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव साथ गी अन्य सचिव शामिल हुए.
बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आला अधिकारियों को बताया गया कि 8 मार्च के एलपीजी नियंत्रण आदेश में रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल उत्पादकों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम स्तर तक ले जाने के साथ साथ घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है. बैठक में ये भी स्पष्ट किया गया कि होटलों और रेस्तरां सहित कमर्शियल प्रतिष्ठानों को एलपीजी के वितरण को रेगुलराइज किया गया है लेकिन अस्पतालों या शैक्षणिक संस्थानों को इस दायरे से बाहर रखा गया है यानि अस्पतालों और शैक्षणिक संगठनों को निर्बाध कमर्शियल एलपीजी सप्लाई जारी रहेगी.
उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ये सलाह दी गई है कि गैस से संबंधित बुनियादी ढांचे और कर्मियों की सुरक्षा बढ़ाकर एलपीजी सप्लाई चेन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को स्थानीय एलपीजी आपूर्ति की दैनिक निगरानी करने का निर्देश दिया गया. साथ ही एलपीजी आपूर्ति के उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और जमीनी स्तर पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की भी सलाह दी गई.
झूठी अफवाहों का खंडन
बैठक में ये भी निर्देश दिया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एलपीजी की कमी के संबंध में आशंकाओं को दूर करने के साथ साथ इस विषय में झूठी अफवाहों का खंडन करने के लिए खुद और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के माध्यम से पर्याप्त जागरूकता अभियान चलाने चाहिए. क्योंकि सरकार घरेलू एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय उपाय कर रही है.
सोशल मीडिया कड़ी निगरानी
गृहसचिव के तरफ से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर कड़ी निगरानी रखने और पुरानी या असंबंधित सामग्री प्रसारित करके अफवाहें फैलाने और झूठी बातें गढ़ने वाली फर्जी खबरों को हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करने की भी सलाह दी गई.
गौरतलब है कि इस क्रम में गृह मंत्रालय ने मजबूत 24×7 नियंत्रण कक्ष को और दुरुस्त किया है जिसमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के नोडल अधिकारियों को शामिल किया गया है. यह नियंत्रण कक्ष गैस सप्लाई से जुड़े तथ्यों को जांचने और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को गैस से संबंधित वर्तमान स्थिति पर तत्काल स्पष्टीकरण देने करने में सक्षम बनाने के लिए की गई है.