महाराष्ट्र विधानपरिषद में भी बिल पास पारित, अब सिर्फ राज्यपाल के दस्तखत बाकी

महाराष्ट्र विधानपरिषद में भी बिल पास पारित, अब सिर्फ राज्यपाल के दस्तखत बाकी

महाराष्ट्र विधानसभा के बाद मंगलवार रात विधानपरिषद में भी महाराष्ट्र धर्मांतरण विधेयक 2026 पास कर दिया गया है. यह विधेयक धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है. अब सिर्फ राज्यपाल के दस्तखत बाद ये कानून की शकल ले लेगा. कल विधानसभा में बिल पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि यह कानून धर्मनिरपेक्ष है और किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं है.

वहीं कांग्रेस और NCP जैसे विपक्षी दलों ने इस बिल की आलोचना करते हुए कहा कि इसका दुरुपयोग हो सकता है. हालांकि, उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (UBT) ने इस बिल का समर्थन किया है.

क्या है नया कानून और क्या हैं सख्त प्रावधान?

इस नए बिल में गैरकानूनी धर्मांतरण को साफ तौर पर परिभाषित किया गया है. किसी भी धर्मांतरण को अगर बलपूर्वक, धोखे से लालच देकर या शादी के जरिए कराया जाता है, तो वह गैरकानूनी माना जाएगा. इस बिल की सबसे अहम बात यह है कि इसमें ‘सबूत का भार’ आरोपी पर होगा. यानी अगर किसी पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगता है, तो उसे ही यह साबित करना होगा कि यह धर्मांतरण स्वेच्छा से हुआ है, न कि किसी दबाव में. इस पाइंट पर विपक्षा और कई जानकारों को आपत्ति है कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है.

सख्त है सजा के प्रावधान

आम धर्मांतरण पर 3 से 5 साल की जेल और 50 हजार से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. अगर यह मामला किसी महिला, नाबालिग या फिर अनुसूचित जाति और जनजाति से जुड़ा है, तो सजा 7 साल तक और जुर्माना 2 लाख रुपये तक बढ़ सकता है. अगर एक साथ कई लोगों का (Mass Conversion) धर्मांतरण कराया जाता है, तो सजा 10 साल तक और जुर्माना 5 लाख रुपये तक हो सकता है.

क्या हैं नियम और कैसे होगी प्रक्रिया?

इस कानून में कुछ प्रक्रियाएं भी तय की गई हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे. अगर कोई व्यक्ति धर्म बदलना चाहता है, तो उसे पहले से डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना देनी होगी. धर्मांतरण कराने वाले धर्मगुरुओं या संस्थाओं को भी 30 दिन पहले नोटिस देना होगा. धर्म बदलने के बाद एक डिक्लेरेशन भी फाइल करना होगा.

इस बिल में यह भी प्रावधान है कि अगर कोई शादी सिर्फ धर्मांतरण के इरादे से की जाती है, तो उसे अमान्य घोषित किया जा सकता है. इस बिल का बचाव करते हुए CM फडणवीस ने कहा कि यह कानून सिर्फ गैरकानूनी धर्मांतरण रोकने के लिए है. उन्होंने साफ किया कि जो लोग अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहते हैं, उन्हें संविधान के आर्टिकल 25 के तहत पूरी आजादी है और इस कानून से उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

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