
करीब साढ़े तीन दशक के बाद अमेरिका के सेंट्रल बैंक फेड रिजर्व की मीटिंग में काफी मतभेद दिखाई दिए. ये मीटिंग कोई मामूली नहीं थी. वो भी तब जब पूरी दुनिया में जियो पॉलिटिकल टेंशन बनी हुई. इस टेंशन में अमेरिका की सीधे तौर पर भागेदारी है. जिसकी वजह से तेल की कीमतें आसमान पर बनी हुई है. अमेरिका में पेट्रोल और डीजल के दाम काफी बढ़ चुके हैं. महंगाई लगातार बढ़ रही है. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधी टक्कर लेने वाले फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल की ये आखिरी मीटिंग भी थी. उनका कार्यकाल अब एक तरह से खत्म हो गया है. जून की मीटिंग में केविन वार्श इस मीटिंग का ना सिर्फ हिस्सा होंगे साथ ही अपनी पहली पॉलिसी का ऐलान भी करेंगे.
बात अगर आज की करें तो जिस तरह से फेड की पॉलिसी मीटिंग में मतभेद और असंतोष के स्वर सुनाई और दिखाई दिए. ऐसा 34 बरस में पहली बार देखने को मिला. जिसकी वजह से पॉलिसी रेट को लगातार तीसरी बार होल्ड पर रख दिया गया. इसका मतलब है कि मौजूदा समस में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने बेंचमार्क फंड्स रेट्स को 3.5%-3.75% की सीमा में बनाए रखने के पक्ष में वोट दिया. बाजार पहले से ही 100 फीसदी संभावना मानकर चल रहे थे कि दरों में कोई बदलाव नहीं होगा.
34 साल बाद सबसे बड़ा मतभेद
बैठक में एक नाटकीय मोड़ तब आया जब अधिकारियों का एक बड़ा समूह इस संदेश का विरोध करने लगा कि भविष्य में दरों में और कटौती हो सकती है. बेंचमार्क फंड्स रेट्स को स्थिर रखने के लिए एक सामान्य वोट की उम्मीद के बीच, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी 8-4 के अनुपात में बंट गई, जिसमें अधिकारियों ने अपने वोट के लिए अलग-अलग कारण बताए. खास बात तो ये है कि पिछली बार चार कमेटी मेंबर्स ने ने अक्टूबर 1992 में असहमति जताई थी.
किन मेंबर्स ने जताई अपनी अहमति
गवर्नर स्टीफन मिरान ने, जैसा कि उन्होंने सितंबर 2025 में केंद्रीय बैंक में शामिल होने के बाद से हमेशा किया है, दरों में चौथाई प्रतिशत की कटौती के पक्ष में असहमति जताई. बाकी तीन “नहीं” वोट रीजनल अध्यक्षों – क्लीवलैंड की बेथ हैमैक, मिनियापोलिस के नील कशकारी और डलास की लोरी लोगान – की ओर से आए. उन्होंने कहा कि वे दरों को स्थिर रखने के फैसले से सहमत हैं, लेकिन “इस समय बयान में दरों में नरमी (easing bias) की ओर झुकाव को शामिल करने का समर्थन नहीं करते.
किस बात पर थी आपत्ति
इन तीनों अधिकारियों को इस वाक्य पर आपत्ति थी कि आने वाले दिनों में ब्याज दरों में किसी तरह के बदलाव से पहले सभी तरह के रिस्क का आंकलन किया जाएगा. इसका मतलब ये है कि अगला कदम दरों में कटौती की दिशा में हो सकता है. हैमैक, कशकारी और लोगान के साथ-साथ फेड के कई अन्य अधिकारियों ने लगातार बनी हुई महंगाई के खतरों के प्रति आगाह किया है. बढ़ती कीमतें फेड के लिए हाई रेट्स का संकेत देती हैं, जबकि फेड 2025 के अंत से ही दरों में नरमी की नीति पर चल रहा है.
2027 तक ब्याज दरों में नहीं होगा बदलाव?
मीटिंग के बाद जारी बयान में, कमेटी ने कहा कि, महंगाई बढ़ी हुई है, जो कुछ हद तक ग्लोबल एनर्जी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी की वजह से है. बाजार इस बात की पूरी उम्मीद कर रहे थे कि दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, और असल में वे इस साल के बाकी समय और 2027 तक भी कोई बदलाव न होने की उम्मीद कर रहे हैं. मार्च की मीटिंग में फेड के अधिकारियों ने संकेत दिया था कि उन्हें इस साल एक बार और फिर 2027 में एक और बार दरों में कटौती की उम्मीद है, जिससे फंड्स रेट घटकर अपने अपेक्षित न्यूट्रल लेवल, लगभग 3.1 फीसदी पर आ जाएगा. पिछले साल लगातार तीन बार कटौती करने के बाद यह लगातार तीसरी मीटिंग थी जिसमें कमेटी ने दरों में कोई बदलाव न करने का फैसला किया.
पॉवेल का 8 साल का कार्यकाल
चेयर के तौर पर अपने आठ साल के कार्यकाल के ज्यादातर समय में, पॉवेल कमेटी के बीच मजबूत आम सहमति बनाए रखने में कामयाब रहे हैं, भले ही Fed को महंगाई पर काबू पाने और व्हाइट हाउस के जबरदस्त राजनीतिक दबाव का सामना करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा हो. हालांकि, पॉलिसी मेकर्स को ऐसे आर्थिक माहौल का सामना करना पड़ रहा है जहां महंगाई Fed के 2 फीसदी के लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और एनर्जी की बढ़ती कीमतें पॉलिसी को और भी मुश्किल बना रही हैं.
आम तौर पर, Fed के अधिकारी इन दोनों वजहों से होने वाले कीमतों में अस्थायी उछाल को नजरअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन इस बार कीमतों में उछाल की अवधि ने कंज्यूमर्स पर पड़ने वाले लंबे समय तक चलने वाले असर को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं.
दूसरी तरफ, कम-भर्ती और कम-छंटनी वाले लेबर मार्केट को लेकर चिंताएं कम हुई हैं. मार्च में नॉन-फार्म पेरोल उम्मीद से बेहतर 178,000 बढ़ा, जबकि बेरोजगारी दर घटकर 4.3 फीसदी हो गई. अप्रैल के लिए, पेरोल प्रोसेसिंग फर्म ADP ने बताया है कि औसत साप्ताहिक निजी पेरोल में लगभग 40,000 की बढ़ोतरी हुई है, जो इस बात का और संकेत देता है कि रोजगार की स्थिति ठीक-ठाक है, भले ही बहुत मजबूत न हो.