नागपुर: बाघ के डर से भागे पिता-पुत्र… डैम में जा गिरे, डूबने से दोनों की मौत; वन विभाग देगा 25-25 लाख मुआवजा

नागपुर: बाघ के डर से भागे पिता-पुत्र… डैम में जा गिरे, डूबने से दोनों की मौत; वन विभाग देगा 25-25 लाख मुआवजा

महाराष्ट्र के नागपुर जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है. यहां बाघ के डर से जान बचाने के लिए भाग रहे पिता और उनके सात वर्षीय बेटे की डैम में डूबने से मौत हो गई. यह हादसा नागपुर के देवलापार क्षेत्र के छावरी शिवार स्थित लखन डैम के पास हुआ. घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर है. वन विभाग ने मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है. साथ ही तत्काल राहत के तौर पर 50 हजार रुपये भी प्रदान किए गए हैं.

मृतकों की पहचान जीवन धर्मदास कोकोड़े और उनके सात वर्षीय बेटे जतिन जीवन कोकोड़े के रूप में हुई है. जानकारी के अनुसार, जीवन कोकोड़े अपने बेटे जतिन और भांजे संजय उइके के साथ लखन डैम के पास स्थित खेत में कृषि कार्य करने गए थे. तीनों खेत में काम कर रहे थे, तभी अचानक उनकी नजर करीब 80 से 100 मीटर की दूरी पर मौजूद एक बाघ पर पड़ी.

बाघ को देखते ही तीनों घबरा गए

प्रत्यक्षदर्शी संजय उइके के अनुसार, बाघ को देखते ही तीनों घबरा गए और अपनी जान बचाने के लिए अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे. संजय डैम के निचले हिस्से की ओर दौड़ा, जबकि जीवन कोकोड़े अपने बेटे जतिन के साथ डैम के ऊपरी हिस्से की तरफ भागने लगे. इसी दौरान अफरा-तफरी में छोटा जतिन संतुलन खो बैठा और फिसलकर सीधे डैम के गहरे पानी में गिर गया.

बेटे को पानी में गिरता देख पिता जीवन कोकोड़े बिना देर किए उसे बचाने के लिए डैम में कूद पड़े. उन्हें तैरना आता था, लेकिन बच्चे को बचाने की कोशिश में वे खुद भी गहरे पानी में चले गए. पानी की गहराई और परिस्थितियों का सही अंदाजा नहीं लग पाने के कारण दोनों बाहर नहीं निकल सके और डूब गए. इस हादसे में पिता और बेटे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई.

घटना की सूचना मिलते ही देवलापार पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी नारायण तुरकुंडे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. वन विभाग के रेंज ऑफिसर शेषराव तुले भी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ घटनास्थल पहुंचे. स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू अभियान चलाया गया और दोनों के शव डैम से बाहर निकाले गए. इसके बाद पंचनामा और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं.

25-25 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान

वन विभाग ने प्रारंभिक जांच में माना कि घटना बाघ के दिखाई देने के बाद मची भगदड़ के दौरान हुई. इसी आधार पर विभाग ने मृतक पिता और पुत्र के वारिसों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है. इसके अलावा तत्काल सहायता के रूप में 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद भी उपलब्ध कराई गई है.

इस घटना ने एक बार फिर जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में इंसान और वन्यजीवों के बढ़ते टकराव की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बाघों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, जिससे खेतों में काम करने वाले किसानों और ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है. ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है.

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