Dakshinayan 2026: देवताओं के लिए आज से शुरू हुई रात, जानिए क्या है दक्षिणायन का रहस्य

Dakshinayan 2026: देवताओं के लिए आज से शुरू हुई रात, जानिए क्या है दक्षिणायन का रहस्य

Kark Sankranti 2026: ज्योतिष में संक्रांति की तिथि को बेहद पवित्र और बड़े बदलावों का दिन माना जाता है. जब भी सूर्य देव अपनी राशि बदलते हैं, तो उसे संक्रांति कहा जाता है. आज यानी 16 जुलाई को सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश कर रहे हैं. इस बदलाव को ‘कर्क संक्रांति’ कहा जाता है. सनातन परंपरा में इस दिन का एक बेहद खास महत्व है, क्योंकि आज से ही सूर्य देव की चाल बदल रही है और ‘दक्षिणायन’ की शुरुआत हो रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षिणायन शुरू होते ही देवताओं की रात शुरू हो जाती है, जो अगले 6 महीनों तक चलती है. आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर दक्षिणायन क्या है, इसका धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व क्या है और क्यों इसे देवताओं की रात कहा जाता है.

क्या होता है दक्षिणायन?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करते हैं तो उनकी गति दक्षिण दिशा की ओर मानी जाती है. इसी अवधि को दक्षिणायन कहा जाता है. यह समय लगभग छह महीने तक रहता है. इसके बाद जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब उत्तरायण की शुरुआत होती है. धार्मिक मान्यता है कि उत्तरायण देवताओं का दिन होता है, जबकि दक्षिणायन देवताओं की रात्रि मानी जाती है. इसलिए आज से अगले छह महीने तक देवताओं की रात मानी जाएगी.

देवताओं की रात क्यों कहा जाता है?

सनातन धर्म में समय की गणना केवल मनुष्यों के अनुसार नहीं, बल्कि देवताओं के दृष्टिकोण से भी की गई है. मान्यता है कि मनुष्यों के एक साल को देवताओं का एक दिन माना जाता है. इस एक दिन के दो भाग होते हैं. पहले छह महीने, यानी मकर संक्रांति से कर्क संक्रांति तक, देवताओं का दिन कहलाते हैं. वहीं कर्क संक्रांति से मकर संक्रांति तक का समय देवताओं की रात्रि माना जाता है. यही कारण है कि कर्क संक्रांति के साथ दक्षिणायन शुरू होते ही देवताओं की रात आरंभ होने की मान्यता है.

दक्षिणायन का धार्मिक महत्व

दक्षिणायन का समय पूजा-पाठ, जप, तप, दान और आत्मचिंतन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस अवधि में व्यक्ति को अपने आध्यात्मिक जीवन पर अधिक ध्यान देना चाहिए. भगवान की भक्ति, मंत्र जाप, व्रत और दान-पुण्य करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है. इसी अवधि में कई प्रमुख धार्मिक पर्व भी आते हैं. सावन का पवित्र महीना, नाग पंचमी, रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, पितृ पक्ष, शारदीय नवरात्रि और दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पर्व दक्षिणायन के दौरान ही मनाए जाते हैं.

क्या शुभ कामों पर पड़ता है असर?

कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि क्या दक्षिणायन में सभी शुभ कार्य बंद हो जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा नहीं है. इस दौरान पूजा-पाठ, दान, व्रत और अधिकांश शुभ कार्य किए जा सकते हैं. हालांकि कुछ विशेष मांगलिक कार्यों के लिए विवाह, गृह प्रवेश या अन्य संस्कारों का मुहूर्त पंचांग और ज्योतिषीय गणना के आधार पर तय किया जाता ह

दक्षिणायन में क्या करें?

दक्षिणायन की शुरुआत के दिन स्नान करके सूर्य देव को जल अर्पित करना शुभ माना जाता है. इसके बाद आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य मंत्र का जाप करें. जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, गुड़, गेहूं या अपनी क्षमता के अनुसार दान दें. इस अवधि में नियमित रूप से भगवान शिव, भगवान विष्णु और सूर्य देव की उपासना करने से सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होने की मान्यता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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