
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से लगातार जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं. अपनी इसी मांग को लेकर वो कल(मंगलवार, 21 जुलाई) को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने विधायकों और मंत्रियों के साथ विरोध प्रदर्शन किया.उमर ने इसे जम्मू-कश्मीर के अधिकारों और लोगों की गरिमा की लड़ाई की शुरुआत बताया. उन्होंने कहा राज्य का दर्जा बहाल करना क्षेत्र के संवैधानिक अधिकारों को पुनः प्राप्त करने के लिए जरूरी आधार बना हुआ है.
यह पहली बार है जब जम्मू-कश्मीर के किसी मौजूदा मुख्यमंत्री ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया है. प्रदर्शन में उमर अब्दुल्ला के पिता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी शामिल हुए। 89 वर्षीय फारूक अब्दुल्ला हाथ में छड़ी लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े रहे.
‘कुछ लोग केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे’
उमर अब्दुल्ला ने प्रदर्शन में शामिल नहीं होने वाले राजनीतिक दलों और नेताओं पर भी निशाना साधा. उन्होंने अपने पिता की उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 90 साल की उम्र में भी वह जम्मू-कश्मीर के अधिकारों और सम्मान के लिए सबसे आगे खड़े हैं, जबकि कुछ लोग घर बैठकर केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं.
We were stopped from getting to Jantar Mantar & stopped from protesting peacefully for what is rightfully ours but we were not silenced. This is only the beginning of our struggle for statehood, our rights, our dignity and everything that was taken away from us. pic.twitter.com/tSMwtPLmqI
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) July 20, 2026
‘लोग समझ गए सड़कों पर उतरने वाले कौन हैं’
उन्होंने कहा ‘जम्मू-कश्मीर के लोगों को अब समझ आ गया है कि सड़कों पर उतरने वाले लोग कौन हैं, लोगों के अधिकारों के लिए, उनकी गरिमा की बहाली के लिए और जम्मू-कश्मीर की बेहतरी के लिए लड़ने और संघर्ष करने को तैयार लोग कौन हैं, और वो लोग कौन हैं जो अपने मोबाइल फोन के माध्यम से काम करते हैं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में हुआ विरोध प्रदर्शन जम्मू और कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों के लिए एक खुला निमंत्रण था क्योंकि राज्य का दर्जा बहाल करना पूरे क्षेत्र का साझा मुद्दा है, न कि किसी एक पार्टी का. उन्होंने कहा ‘मुझे इस बात से बेहद दुख हुआ है कि जो लोग खुद को जम्मू-कश्मीर के लोगों का हमदर्द कहते हैं, वे ऐसे मौकों पर अपनी हमदर्दी भूल जाते हैं। और फिर वे क्या कहते हैं? पहले जाकर अनुच्छेद 370 की बात करते हैं’.
कई नेताओं और पार्टियों को बुलाया था
NC ने राज्य का दर्जा बहाल करने की अपनी मांग में शामिल होने के लिए कई राष्ट्रीय नेताओं और पार्टियों को बुलाया था, जिनमें कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी भी शामिल थीं, लेकिन राजधानी में NC विधायकों के साथ सिर्फ़ कांग्रेस के वे नेता ही चलते दिखे जो J&K सरकार में सहयोगी हैं.
उमर ने कहा कि हालांकि उनमें से कई लोगों ने विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का वादा किया था, लेकिन वो प्रदर्शन स्थल तक नहीं पहुंच पाए. उमर ने कहा ‘उनमें से कुछ ने मुझसे बात की, बस वे वहां पहुंच नहीं पाए. हमें TMC, NCP, DMK, SP और अन्य पार्टियों से वादा मिला था. INDIA गठबंधन के भीतर, हमें यकीन था कि वे शामिल होंगे. लेकिन (दिल्ली में) हालात बहुत अस्त-व्यस्त थे, मैं उन्हें दोष नहीं देता’.
लोगों के अधिकार और सम्मान बहाल करो
उमर अब्दुल्ला ने हाथ में एक तख्ती भी ले रखी थी, जिस पर लिखा था, जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकार और सम्मान बहाल करो. उन्होंने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों और गरिमा को बहाल करने और राज्य का दर्जा वापस दिलाने के व्यापक संघर्ष की शुरुआत है.
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका गया. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने कहा ‘हमें जंतर-मंतर जाने और अपने जायज हक़ के लिए शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने से रोका गया, लेकिन हमारी आवाज नहीं दबाई जा सकी.यह तो बस राज्य का दर्जा, अपने अधिकार, अपनी गरिमा और हमसे छीनी गई हर चीज़ को वापस पाने के हमारे संघर्ष की शुरुआत है’.
ऑटो में बैठे हुए शेयर किया वीडियो
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए जा रहे उमर अब्दुल्ला को जब रोका गया तो वह ऑटो लेकर गए. उन्होंने इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है जिसमें वो और उनके साथी ऑटो में बैठे नजर आ रहे हैं. उमर ने लिखा कि जंतर-मंतर से मेरी पैदल यात्रा एक और जुलूस में बदलने ही वाली थी, इसलिए हमने सबसे पहले जो भी सवारी मिली, उसे पकड़ लिया.
My walk from Jantar Mantar was about to turn into another procession so we grabbed the first available means of transport
. pic.twitter.com/R8mtp3hk5X
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) July 20, 2026
अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के तहत मिले विशेष दर्जे को खत्म कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था. जिसको लेकर काफी बवाल मचा था. अब्दुल्ला पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग कर रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार को संसद और सुप्रीम कोर्ट में किए गए उसके वादे की याद दिलाते हुए पूछा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का ‘उचित समय’ आखिर कब आएगा. उन्होंने कहा कि केंद्र को इस बारे में स्पष्ट जवाब देना चाहिए.
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